JPH BHOPAL में कोरोना मरीजों को लावारिस छोड़ा, परिवार के लोग खाना और दवाई खिला रहे हैं

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भोपाल।
चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कोविड-19 से पीड़ित मरीज से संक्रमण का खतरा होता है। डॉक्टर भी PPE KIT पहनकर वार्ड में जाते हैं लेकिन भोपाल स्थित सरकारी जयप्रकाश अस्पताल में कोरोनावायरस से पीड़ित मरीजों को लावारिस छोड़ दिया गया है। वार्ड खुला है। कोई भी आ-जा सकता है। भर्ती मरीजों के परिवारजनों को खाना और दवाइयां लाकर अपने हाथ से खिलानी पड़ रही है। 

कोरोनावायरस पीड़ित मरीज की पत्नी ने मंत्री विश्वास सारंग को सारी बात बताइए

दो दिन पहले कोलार की सर्वधर्म कॉलोनी निवासी 43 वर्षीय महिला संतोष रजक की मौत हो गई थी। अब कोरोना पॉजीटिव सुरेश शर्मा की पत्नी आशा शर्मा ने चिकित्सा शिक्षा, भोपाल गैस त्रासदी एवं पुनर्वास मंत्री विश्वास सारंग के सामने अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े किए तो वे भी हैरान रह गए। रोते हुए आशा बोली कि पति को न तो समय पर भोजन मिलता है और न ही दवाई। वे भूखे-प्यासे ही कोरोना से लड़ाई लड़ रहे हैं। मजबूरन मैं ही कोविड वार्ड में दवाई व भोजन देने जाती हूं। आशा की बात सुन मंत्री सारंग की नाराजगी बढ़ गई। स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल व कलेक्टर अविनाश लवानिया को जांच कराने के निर्देश देकर उन्होंने सिविल सर्जन आरके तिवारी को जमकर फटकार लगाई।

संतोष रजक की मौत के लिए अस्पताल की लापरवाही जिम्मेदार

दरअसल, महिला संतोष रजक की मौत और अस्पताल में सामने आ रही अव्यवस्थाओं की जांच करने के लिए मंत्री सारंग शनिवार दोपहर एक बजे अस्पताल पहुंचे थे। आधे घंटे तक उन्होंने सिविल सर्जन कक्ष में विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इसके बाद आइसीयू, ऑक्सीजन कक्ष एवं भोजनशाला का मुआयना किया। ऑक्सीजन कक्ष में जाकर रजिस्टर भी देखा और सिविल सर्जन तिवारी से सवाल-जवाब किए। 

लौटते समय पति के इलाज के लिए रोने लगी

करीब एक घंटे के निरीक्षण के बाद जब मंत्री सारंग लौटने लगे तो महिला आशा उनके सामने आ गई और पति के इलाज न होने की बात कहते हुए रोने लगी। आशा ने तीन अस्पतालों की आपबीती मंत्री को सुनाई।

रेड क्रॉस अस्पताल में ₹35000 जमा करा लिए फिर बोले मशीन नहीं है

मैं 12 नंबर बस स्टॉप पर रहती हूं। कुछ दिन पहले पति सुरेश शर्मा की तबीयत बिगड़ गई थी। तेज बुखार, सर्दी-जुकाम था। इसलिए रेडक्रास अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया। दो दिन में इलाज के नाम पर 35 हजार रुपये ले लिए गए। फिर डॉक्टर बोले कि सांस की समस्या है। यहां आइसीयू मशीन नहीं है। इसलिए दूसरे अस्पताल ले जाओ। वहां से पति को जेके अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां साढ़े चार हजार रुपये देकर कोरोना की जांच कराई। रिपोर्ट आने तक उन्हें आइसीयू में रखा गया और पांच दिन पहले जेपी अस्पताल में लेकर आ गए। 

जेपी अस्पताल के डॉक्टर रोज ₹5500 का इंजेक्शन मंगवाते हैं

रोज साढ़े पांच हजार रुपये के इंजेक्शन खरीदकर दे रही हूं, लेकिन तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। पति को न तो समय पर दवा मिल रही है और न ही भोजन मिलता है। इसलिए मुझे ही कोविड वार्ड में भोजन-दवाई देने जाना पड़ रहा है। अस्पताल की ओर से पीपीई किट और सुरक्षा के कोई भी साधन नहीं दिए जाते। जैसी अभी खड़ी हूं, वैसी ही कोविड वार्ड में जाती हूं। मंत्रीजी से इसे लेकर शिकायत की है। उन्होंने पति को उचित इलाज दिलाने का भरोसा जताया है।
(जेपी अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित सुरेश शर्मा की पत्नी आशा शर्मा ने बताया)

व्यवस्था में तत्काल सुधार के बजाए जांच के निर्देश

अस्पताल एक संवेदनशील स्थान होता है। यहां मरीज या उनके परिजन इसलिए शिकायत नहीं करते कि मामले की जांच कराई जाए और किसी को दंडित किया जाए बल्कि वह चाहते हैं कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान हो जाए। मंत्री विश्वास सारंग ने समस्या के समाधान में कोई रुचि नहीं दिखाई। उनका बयान है कि 'महिला ने अपनी आपबीती सुनाई। मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। दोषी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।' सवाल यह है कि क्या जांच पूरी होने तक महिला को इसी तरह कोविड वार्ड में अपने पति को खाना खिलाने जाना पड़ेगा।

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