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बोनस, नियोक्ता का एहसान है या कर्मचारी का अधिकार, पढ़िए The payment of Bonus act, 1965

भारत के अन्दर बहुत से बडे बडे कारखाने, उद्योग, कंपनियों स्थापित है इनमें हजारों श्रमिक कार्य करते हैं, सभी को हर वर्ष बोनस के तौर पर सैलरी बड़ाई जाती है जिससे कर्मचारियों में खुशी का माहौल होता है क्या किसी प्राइवेट लिमिटेड कारखाने, उद्योग, या फैक्टरी में बोनस दिया जाता है वह उन पर मालिक की दया होती है या उनका कोई कानूनी अधिकार। अगर कानूनी अधिकार है तो कितना बोनस मिलना चाहिए कर्मचारियों को जानिए सभी बातों का जबाब आज के लेख में।

बोनस भुगतान अधिनियम,1965 की परिभाषा (सरल एवं संक्षिप्त शब्दों में):-

कोई भी कर्मचारी(कुशल, अकुशल श्रमिक, तकनीकी, लिपिक आदि) आदि जिनका वेतन 21,000 हजार से अधिक न हो उनको न्यूनतम बोनस 8.33% एवं अधिकतम बोनस 20% भुगतान किया जाएगा। यह बोनस भुगतान नियोजक द्वारा लेखा वर्ष की समाप्ति में या एक माह के भीतर अन्यथा किसी अन्य दशा की स्थिति में 8 माह के भीतर बोनस का भुगतान किया जाएगा।

निम्न व्यक्ति बोनस के पात्र नहीं होते हैं

अधिनियम की धारा-9 के अनुसार किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति :- कपट या हिंसात्मक आचरण से हुई हो, संपत्ति की चोरी से, किसी भी दुरपयोग, गबन या तोड़फोड़ आदि आचरण के कारण हुई हो।

बोनस भुगतान अधिनियम,1965 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

अगर कोई कर्मचारी को बोनस नहीं दिया जा रहा है तब इनकी सुनवाई का अधिकार अधिनियम की धारा- 30 के अनुसार  प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को होता है । 
दण्ड(सजा)- अधिनियम की धारा- 28 के अनुसार अगर कोई नियोजक अपने कर्तव्य का पालन नहीं करता है तब उसे एक हजार रुपये जुर्माना या छः माह का कारावास या दोनो से दाण्डित किया जा सकता है।

(पार्ट टाइम काम करने वाले कर्मचारियों को भी बोनस मिलेगा):-

अरुण मिल्स लिमिटेड बनाम डॉ. चंद्रप्रसाद त्रिवेदी(1976)- न्यायालय द्वारा उपर्युक्त वाद में कहा गया है कि अंशकारींन(part time) कार्यरत कर्मचारी को बोनस प्राप्त करने की पात्रता हैं। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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