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सरकारी अधिकारी निर्दोष नागरिक को जबरन रोककर रखे तो IPC की किस धारा के तहत मामला दर्ज होगा / ABOUT IPC

स्कूल से लेकर नौकरियां या कारोबार तक कई बार ऐसे अवसर आते हैं जब कोई सरकारी अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए किसी व्यक्ति को जांच या पूछताछ के नाम पर हिरासत में रखता है। स्कूल में चोरी हो जाए तो प्रिंसिपल जांच के नाम पर अपने कानून लागू कर देता है। कॉलेज में विवाद होने पर प्रिंसिपल या दबंग प्रोफेसर पद का दुरुपयोग कर बनाए गए नियमों के तहत छात्रों को एक कक्ष में बैठे रहने के लिए बाध्य कर देते हैं। पुलिस अधिकारी तो अक्सर ऐसा करते ही हैं। कई बार टैक्स कलेक्शन करने वाले अधिकारी भी व्यापारियों को पूछताछ और जांच के बहाने अवैध रूप से हिरासत में ले लेते हैं। ऐसी कार्रवाई के समय अक्सर वो पूरे विश्वास के साथ यह जताने की कोशिश करते हैं कि वह जो कुछ भी कर रहे हैं न्याय और नियम के अनुसार है। परंतु भारतीय दंड संहिता की धारा 220 के तहत इस तरह की कार्यवाही एक अपराध है।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 220 की परिभाषा:-

किसी लोकसेवक द्वारा यह जानते हुए कि ऐसा कार्य करना विधि के विपरीत है, किसी व्यक्ति को भ्रष्टाचार या भेदभावपूर्वक मुकदमे के लिए पेश किया जाना या हवालात, हिरासत में बन्द रखना भी दण्डनीय अपराध है।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 220 में दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते है। इनकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के दूआरा की जाती हैं।
सजा- सात वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है। 
बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद म.प्र.) 9827737665


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