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गर्भपात के दौरान यदि महिला की मृत्यु हो गई तो जेल कौन जाएगा डॉक्टर या पति / ABOUT IPC

सामान्यता ऐसा नहीं होता। गर्भपात के मामले में डॉक्टर्स बेहद सतर्कता बरतते हैं। कई बार डॉक्टर योग्यता ना होने के बावजूद जानलेवा कैंसर तक का इलाज करने लगते हैं परंतु गर्भपात के मामले में वह रिस्क नहीं लेते फिर भी यदि गर्भपात के दौरान (चाहे अबॉर्शन मर्जी से हो या बिना मर्जी के) महिला की मृत्यु हो जाए तो क्या इसे अपराध माना जाएगा। और यदि माना जाएगा तो इसके लिए किसे आरोपित किया जाएगा, गर्भपात करने वाले डॉक्टर को या फिर डॉक्टर का चुनाव करने वाले महिला के पति या प्रेमी को। आइए जानते हैं।

भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 314 की परिभाषा:-

जो कोई व्यक्ति गर्भवती महिला का गर्भपात (अबोर्शन) कराने के उद्देश्य से ऐसा कार्य करेगा जिससे उस महिला की मृत्यु हो जाए वह इस धारा के अंतर्गत दोषी होगा।
1. स्त्री की सहमति से या जानबूझकर सही स्थान पर अबोर्शन न कराने पर।
2. स्त्री की सहमति के बिना अबोर्शन कराने पर।
3. इस धारा में गर्भपात में प्रारम्भिक स्तर से स्पन्दनगर्भा तक आते हैं।
नोट:- इस धारा के अपराध में यह आवश्यक नहीं है कि अपराधी जानता हो कि कार्य (अबोर्शन) में मृत्यु होना है।

आईपीसी की धारा 314 के तहत दण्ड का प्रावधान:-

धारा 314 का अपराध किसी भी तरह से समझौता योग्य नहीं होते है। इस धारा के अपराध को दो श्रेणी में बाँटा गया है।
(1). गर्भपात (अबोर्शन) कराने के उद्देश्य से किया गया कार्य या सहमति से भी होना हो सकता है- यह संज्ञये एवं अजमानतीय अपराध है। सजा - दस वर्ष की कारावास और जुर्माना हो सकता है।
(2). स्त्री की बिना सहमति से किया गया अबोर्शन जिसमें महिला की मृत्यु हो तब - आजीवन कारावास या उपर्युक्त क्र. (1) के अनुसार सजा। धारा 314 के अपराध की सुनवाई सेशन न्यायालय द्वारा होती हैं।

उधारानुसार वाद- सुरेन्द्र चौहान बनाम मध्यप्रदेश राज्य- अपीलार्थी (आरोपी) के मृतक महिला से अवैध संबंध थे। वह महिला को गर्भपात (अबोर्शन) कराने के उद्देश्य से उसे एक डॉक्टर की क्लीनिक में ले गया। वह डॉक्टर न तो गर्भ का समापन करने की योग्यता रखता था और न ही उसका क्लीनिक सरकार द्वारा अनुमोदित था। जैसा कि गर्भ के चिकित्सीय समापन नियमावली में जरूरी था। अबोर्शन की प्रक्रिया के दौरान ही महिला की क्लीनिक में मृत्यु हो गई जिसका महत्वपूर्ण कारण गंभीर मानसिक आघात या गर्भपात कराते समय बेहोशी का प्रयोग नहीं किया जाना था। अपीलार्थी(आरोपी)  को धारा 314 के अपराध का दोषी ठहराना न्यायोचित था।
बी. आर. अहिरवार होशंगाबाद (पत्रकार एवं लॉ छात्र) 9827737665


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