कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा क्यों है, पढ़िए मजेदार जानकारी - GK IN HINDI

Bhopal Samachar
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भारत के 2 सबसे बड़े राजनीतिक दलों में से एक कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा है परंतु क्या आप जानते हैं कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हमेशा से हाथ का पंजा नहीं था और ना ही चुनाव चिन्ह के रूप में हाथ का पंजा के पीछे 'श्रम शक्ति' का कोई संदेश है बल्कि उत्तर प्रदेश के एक सिद्ध बाबा के कारण इंदिरा गांधी ने कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह बदलकर हाथ का पंजा कर दिया था। 

इंदिरा गांधी को आशीर्वाद के कारण कांग्रेस का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा

देश में आपातकाल के बाद चुनाव हुए, तो इंदिरा गांधी हार गई थीं। कहते हैं कि वह यूपी के देवरिया जिले में देवरहा बाबा से आशीर्वाद लेने गईं। बाबा ने उन्हें हाथ उठाकर पंजे से आशीर्वाद दिया। वहां से लौटने के बाद इंदिरा गांधी ने कांग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ का पंजा ही तय किया। इसी चिह्न पर 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत प्राप्त किया और वे देश की प्रधानमंत्री बनीं।

कौन थे देवरहा बाबा जो 500 साल तक जिंदा रहे

जिस बाबा से इंदिरा गांधी ने आशीर्वाद लिया था, वह देवरिया जिले के रहने वाले थे। ऐसे में उनका नाम देवरहा पड़ा। कुछ मान्यताओं के अनुसार, वह दैवीय शक्तियों से संपन्न थे, इसलिए उन्हें भक्तों ने देवरहा बाबा कहा। आयु, योग, ध्यान और आशीर्वाद, वरदान देने की क्षमता के कारण लोग उन्हें सिद्ध संत कहते थे। उनके अनुयायियों का मानना है कि वह 250 से 500 वर्ष तक जीवित रहे। 19 जून 1990 के दिन अपना शरीर छोड़ने वाले देवरहा बाबा की चमत्कारी शक्ति को लेकर तरह-तरह की बातें कही-सुनी जाती हैं। 

कांग्रेस पार्टी का सबसे पहला चुनाव चिन्ह क्या था 

कांग्रेस पार्टी का सबसे पहला चुनाव चिन्ह बैल जोड़ी था जो पंडित जवाहरलाल नेहरू के समय में फाइनल किया गया था। इस चुनाव चिन्ह के माध्यम से कांग्रेस पार्टी खुद को किसानों की हितेषी पार्टी बता दी थी। बाद में कांग्रेस पार्टी का विभाजन हुआ और चुनाव आयोग ने चुनाव चिन्ह बैल जोड़ी को जप्त कर लिया। कामराज कांग्रेस को गांधीजी का चरखा चुनाव चिन्ह दिया गया जबकि इंदिरा गांधी की कांग्रेस को 'गाय और बछड़ा' चुनाव चिन्ह मिला। आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी ने इसी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा और शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा। इसके बाद बाबा के आशीर्वाद स्वरुप इंदिरा गांधी ने कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह बदलकर हाथ का पंजा कर दिया। 

कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी का चुनाव चिन्ह हाथ का पंजा भारत की श्रम शक्ति का प्रतीक नहीं है बल्कि इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी को मिले बाबा के आशीर्वाद का प्रतीक है। 

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