जबलपुर, 22 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हैं अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर का कहना है कि, हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश जारी किया है, उसमें एक टेक्निकल गलती है। इसको ठीक किया बिना हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकती। इसलिए वह रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे। कुल मिलाकर 3 महीने में डिसीजन की उम्मीद एक बार फिर कमजोर पड़ गई है।
Madhya Pradesh OBC Reservation Row Deepens After Alleged Error in Supreme Court Order
श्री ठाकुर ने बताया कि, मध्य प्रदेश राज्य सरकार द्वारा ओबीसी आरक्षण के समस्त प्रकरणों को जबलपुर हाईकोर्ट से सर्वोच्च न्यायलय ट्रांसफर कराए गए रहे थे। उक्त समस्त मामलों की सुनवाई छत्तीसगढ़ राज्य ले आरक्षण के प्रकरणों के साथ सुनवाई हेतु सूचिबद्ध किए गए। दिनांक 19/02/2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने विस्तृत आदेश पारित कर मध्य प्रदेश के मामलों के साथ छत्तीसगढ़ राज्य के भी मामलों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिए गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के उक्त आदेश में विशेष अनुमति याचिकाएं भी वापस की गईं हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर का कहना है कि सर्वोच्च न्यायलय के उक्त आदेश मे त्रुटि सुधार हेतु सर्वोच्च न्यायालय मे रिव्यु याचिका दाखिल की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि सर्वोच्च न्यायलय मे दायर SLP मे संबंधित हाईकोर्ट का आदेश निरस्त किए बिना संबंधित हाईकोर्ट को वापस नहीं भेजा जा सकता।

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