कैलाश विजयवर्गीय के लिए बस आज की रात है आखिरी... Madhya Pradesh Politics

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 19 फरवरी 2026
: इसमें कोई डिबेट नहीं है कि नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को विधानसभा में घेर लिया गया है। सरकार के पास उनके बचाव के लिए कोई उपाय नहीं है। भागीरथपुरा मामले में कांग्रेस पार्टी उनसे इस्तीफा की मांग की कर रही है। विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बड़ी चतुराई के साथ उनको एक दिन का समय दिलवा दिया है। कैलाश विजयवर्गीय के पास बस आज की रात आखिरी है। यदि उन्होंने विपक्ष के विधायकों को ठंडा करने का कोई उपाय नहीं खोजा तो उनके माथे पर लगा भागीरथपुरा का कलंक और काला हो जाएगा। वह मंत्री पद की कुर्सी पर बने रहेंगे परंतु सम्मान चला जाएगा।

मुख्य बिंदु और सरकारी पक्ष:

• उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सदन को जानकारी दी कि भागीरथपुरा में जलजनित बीमारी (एक्यूट डायरियल डिजीज) के फैलने की सूचना 29 दिसंबर 2025 को प्राप्त हुई थी। जांच में कॉलरा (हजा) और ई-कोलाई के संक्रमण की पुष्टि हुई है।
• आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस प्रकोप के कारण अब तक 22 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और कुल 459 लोग अस्पताल में भर्ती किए गए। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दावा किया कि मरने वालों की संख्या 35 से अधिक है।
• सरकार ने अब तक प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा कि सरकार इस राशि को बढ़ाकर 4 से 5 लाख रुपये करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले एक आईएएस (IAS) अधिकारी को निलंबित किया जा चुका है।
• सरकार ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार, एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा इस पूरे प्रकरण की जांच की जाएगी। 

विधानसभा में विपक्षी पार्टी कांग्रेस क्या चाहती है

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया और कहा कि जब मौतें 21 दिसंबर से शुरू हो गई थीं, तो सरकार 29 तारीख तक क्यों सोती रही। विपक्ष ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग की।

चर्चा के दौरान सदन का माहौल इतना गरमा गया कि कांग्रेस के कई विधायक 'गर्भगृह' में उतर आए और नारेबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

विधानसभा में कैलाश विजयवर्गीय के बारे में क्या कहा गया 

• विपक्षी सदस्यों ने इस घटना के लिए 'मृत्यु' के बजाय 'हत्या' (Murder) शब्द का बार-बार प्रयोग किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह "मृत्यु नहीं हत्या है" और "सिस्टम के कारण भागीरथपुरा के अंदर 35 लोगों की हत्या हुई है"। विधायक महेश परमार ने भी इसे "सिस्टम के कारण हुई हत्या" करार दिया।
• विधायक सचिन सुभाष चंद्र यादव ने मंत्रियों पर निशाना साधते हुए कहा कि "इनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है, कोई नैतिकता नहीं है? इतना क्या कुर्सी का इनको मोह है"। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि "निर्दोष लोगों की हत्या करने का काम किया गया है"।
• जब उप मुख्यमंत्री ने कैलाश विजयवर्गीय के बचाव में उनके वहां काम करने का उल्लेख किया, तो उमंग सिंघार ने इसे तंज कसते हुए "कार सेवा" करना कहा।
• सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के 'नैतिकता' के तर्क का जवाब देने के लिए "नरसंहार" और "अपराधियों को भगाने" जैसे शब्दों का प्रयोग किया। राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने 1984 के सिख दंगों और यूनियन कार्बाइड हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने "हजारों सिखों का नरसंहार" किया था और "अपराधियों को भगाने का काम" किया था। विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी "सिखों को जिंदा जला दिया गया" जैसे कड़े वाक्यों का प्रयोग किया। 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस घटना के लिए "मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की जवाबदारी है" और उन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री अपनी जवाबदारी अधिकारियों पर डाल रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कैलाश विजयवर्गीय का बचाव करते हुए बताया कि घटना के बाद वे "20 गलियों में लगातार सुबह से शाम तक" घूमते रहे। उन्होंने आगे कहा कि विजयवर्गीय वहां तीन दिनों तक रुके और पानी की सप्लाई को डिसकनेक्ट कराने जैसे राहत कार्यों की खुद निगरानी की।

अध्यक्ष का आश्वासन:
भारी गतिरोध के बाद, विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि वे इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए कल पुनः अवसर देंगे, जिसके बाद विपक्ष शांत हुआ। फिलहाल, पूरा प्रदेश इस मामले में होने वाली न्यायिक जांच की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदमों का इंतजार कर रहा है। 
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