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सभी पदोन्नति नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक नहीं, विभाग 3 माह में निर्णय ले: हाईकोर्ट - EMPLOYEE NEWS

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा प्रमोशन में आरक्षण विवाद पर दिए गए फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका एवं उसके आधार पर जारी हुआ स्थगन आदेश सभी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए प्रभावशील नहीं है। इसलिए ऐसे कर्मचारी जो आरक्षण विवाद के दायरे में नहीं आते, प्रमोशन प्राप्त कर सकते हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वन विभाग को 90 दिवस के भीतर इस प्रकार के एक मामले का निपटारा करने के आदेश दिए हैं।

DPC ने 26 फरवरी 2016 को प्रमोशन की सिफारिश की थी

श्री पंकज पाण्डे वनरक्षक, अनुसंधान विस्तार वृत्त रीवा, को वनरक्षक से वनपाल के पद पर पद्दोन्नति हेतु दिनाँक 26/02-2016 को विभागीय पद्दोन्नति समिति द्वारा प्रमोशन हेतु पात्र पाते हुए पद्दोन्नति आदेश जारी करने हेतु सिफारिश की गई थी। उसके पश्चात उस सूची में शामिल कई कर्मचारियों की पद्दोन्नति आदेश जारी किए गए थे। 

प्रमोशन में आरक्षण विवाद के कारण पदोन्नति आदेश जारी नहीं हुए

परंतु, पद्दोन्नति में आरक्षण से संबंधित विवाद उच्चतम न्यायालय पहुचा जहां, कथित रूप से सभी संवर्गो की पद्दोन्नति पर उच्चतम न्यायालय द्वारा यथास्थिति के आदेश पारित किए गये थे। उपरोक्त कारणों से श्री पंकज पाण्डे की पद्दोन्नति के आदेश जारी नही किये जा सके थे।

मध्यप्रदेश शासन के पदोन्नति नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे नहीं लगाया

उसके पश्चात, अन्य पीड़ित कर्मचारियों द्वारा, उच्चतम न्यायालय द्वारा यथास्थिति के आदेश के स्पष्टीकरण के संबंध में रिट याचिकायें दायर कर, DPC की सिफारिश के अनुपालन में पद्दोन्नति आदेश जारी करने का अनुतोष चाहा गया था। उच्च न्यायालय, द्वारा अंतिम रूप से अभिनिर्धारित किया था कि, सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विवाद आरक्षण प्रदान करने वाले प्रावधानों के संबंध में है, ना कि सम्पूर्ण पद्दोन्नति नियम पर। 

प्रमोशन में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे सभी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए नहीं है

इसके अतिरिक्त, भारत सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में मध्यप्रदेश सरकार भी सुझाव दिया गया था कि आरक्षित से आरक्षित एवं अनारक्षित से अनारक्षित श्रेणी के कर्मचारियों के प्रमोशन के संबंध में गुण दोष के आधार पर, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विचार किया जा सकता है। इसके अलावा यह भी माना गया कि उच्चतम न्यायालय के यथास्थिति का आदेश सभी श्रेणी के कर्मचारियों लिए नही है।

श्री पंकज पांडेय की वनपाल के पद पर पद्दोन्नति आदेश जारी नही किये जाने से व्यथित  होकर, उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष रिट याचिका दायर कर विभाग को निर्देशित करने का अनुतोष मांगा गया था। श्री पांडे की तरफ से पैरवीकार अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी, उच्च न्यायालय, जबलपुर ने बताया कि, दिनांक 14/09/2020 को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा हुई सुनवाई में कोर्ट को बताया गया कि कर्मचारी की प्रमोशन की पात्रता के संबंध में विभाग द्वारा कोई विवाद नही है। दिनांक 26/02/16 को कर्मचारी की पद्दोन्नति वनपाल के पद पर करने के संबंध में पद्दोन्नति समिति द्वारा सिफारिश की गई थी। उनके साथ के कई कर्मचारी उसी दिनाँक की DPC की अनुशंसा के आधार पर प्रमोशन प्राप्त कर चुके है।  

अधिवक्ता, अमित चतुर्वेदी, द्वारा कोर्ट द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तों एवं राज्य एवं केंद्र शासन द्वारा इस संबंध में जारी आदेशो कीओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया गया था।  माननीय कोर्ट द्वारा, प्रकरण का अंतिम रूप से निराकरण करते हुए, विभाग को निर्देश दिया गया है कि कर्मचारी के प्रमोशन आदेश जारी करने के संबंध में दिये गए, अभ्यावेदन का निराकरण, पूर्व निर्णीत समान प्रकरणो में स्थापित विधि के अनुसार,   90 दिवस के भीतर करे।

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