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सूर्य ग्रहण 2020: वैज्ञानिक एवं धार्मिक दिशा निर्देश, क्या करें- क्या ना करें / SURYA GRAHAN GUIDELINE

नई दिल्ली। भारत में वर्ष 2020 का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून को होगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण है। यानी सूर्य का करीब 98.8% भाग चंद्रमा ढक देगा। भारत के सभी शहरों से पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा। ज्यादातर इलाकों में आंशिक सूर्य सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

सूतक काल में क्या करें क्या ना करें

21 जून को पड़ने वाले ग्रहण का सूतक काल 20 जून को रात 09:15 बजे सूतक काल लगेगा। 
यह सूतक काल 21 जून को ग्रहण की समाप्ति पर खत्म होगा। 
प्रमुख मंदिर और धार्मिक स्थल सूतक काल के दौरान बंद रहेंगे।
ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान करना अनिवार्य है। 
ग्रहण के दौरान सभी को भगवान के मंत्रों का जाप करना चाहिए।  
ग्रहण के बाद कपड़ों सहित स्नान करना चाहिए। 
सूतक काल में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मंदिरों के कपाट बंद कर दें। 
घर में भी मंदिर को कपड़े से कवर कर देना चाहिए। 
इस दौरान कोई पूजा पाठ नहीं किया जाता है। 
ग्रहण के बाद आसन, गोमुखी व मंदिर में बिछा हुआ कपड़ा सभी को धो दें। 
गोमूत्र या गंगाजल का छिड़काव पूरे घर में करें।
ग्रहण के समय सोना नहीं चाहिए। इससे रोग बढ़ते हैं। 
सूतक काल लगते ही ऐसे सभी खाद्यपदार्थ जो संक्रमित हो सकते हैं, तुलसी या कुश मिश्रित जल में रख देना चाहिए। ग्रहण के बाद निकाल कर उपयोग कर सकते हैं। 
ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। 
बाल और वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए । 
ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, ये सब कार्य वर्जित हैं।
ग्रहण के समय कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। 
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और रोगी को यह नियम मानने के जरूरत नहीं है। 

सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 का समय

21 जून को सुबह 9:15 बजे ग्रहण शुरू हो जाएगा। 
12:10 बजे दोपहर में पूर्ण ग्रहण दिखेगा। इस दौरान कुछ देर के लिए हल्का अंधेरा सा छा जाएगा। 
इसके बाद 03:04 बजे ग्रहण समाप्त होगा। 
यानी करीब 6 घंटे का लंबा ग्रहण होगा। 
दिल्ली में सूर्य ग्रहण की शुरुआत सुबह 10:20 बजे के करीब होगी। ग्रहण दोपहर 12:02 बजे अपने पूर्ण प्रभाव में होगा और इसकी समाप्ति दोपहर 01:49 बजे होगी। 
देश के अन्य शहरों में ग्रहण के समय में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

सूर्य ग्रहण कहां कहां दिखाई देगा

भारत समेत इस ग्रहण का नजारा नेपाल, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूऐई, एथोपिया तथा कोंगों में दिखेगा। वहीं भारत में देहरादून, सिरसा अथवा टिहरी कुछ प्रसिद्ध शहर है जहां पर लोग वलयाकार सूर्य ग्रहण का खूबसूरत नजारा देख पाएंगे। देश के अन्य हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा।

वलयाकार सूर्य ग्रहण क्‍या होता है 

ये ग्रहण न ही आंशिक सूर्य ग्रहण होगा और न ही पूर्ण सूर्यग्रहण, क्योंकि चन्द्रमा की छाया सूर्य का करीब 99% भाग ही ढकेगी। आकाशमण्डल में चन्द्रमा की छाया सूर्य के केन्द्र के साथ मिलकर सूर्य के चारों ओर एक वलयाकार आकृति बनायेगी। जिससे सूर्य आसमान में एक आग की अंगूठी की तरह नजर आएगा। साल के सबसे बड़े दिन पर ये ग्रहण लगने जा रहा है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है और सूर्य के मध्य भाग को पूरी तरह से ढक लेता है तो इस घटना को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इसके परिणामस्वरूप सूर्य का घेरा एक चमकती अंगूठी की तरह दिखाई देता है।

सूर्यग्रहण देना हो तो क्या सावधानियां जरूरी हैं

चंद्रमा की तरह सूर्य ग्रहण खुली आंखों से नहीं देखना चाहिए। रेटीना पर इसका बुरा असर पड़ता है। सूर्य ग्रहण को सुरक्षित तकनीक या तो एल्युमिनेटेड मायलर, ब्लैक पॉलिमर, शेड नंबर 14 के वेल्डिंग ग्लास या टेलिस्कोप द्वारा सफेद बोर्ड पर सूर्य की इमेज को प्रोजेक्‍ट करके करके उचित फिल्टर का उपयोग करके देखा जा सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर व्यूइंग ग्लासेज (Solar viewing glasses) या टेलिस्कोप-दूरबीन जैसे स्पेशल फिल्टर्स का इस्तेमाल करना चाहिए। सूरज को सीधे देखने से आंखों का पर्दा खराब हो सकता है और हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है।

सूर्यग्रहण: गर्भवती महिलाओं के लिए दिशा निर्देश

भारतीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण शुरू होने से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक यानी ग्रहणकाल (21 जून को 09:15AM से 03:04PM तक) में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। घर के बुजुर्गों की सलाह के अनुसार ही जरूरी उपाय अपनाएं। माना जाता है कि ग्रहण के दौरान महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। हालांकि मन में किसी प्रकार का भय या चिंता नहीं रखनी चाहिए। ग्रहण वाले दिन को भी आम दिनों की तरह एक सामान्य दिन मानना चाहिए।

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