यदि कोई पुजारी आम नागरिकों को मंदिर में प्रवेश से रोके तो हाईकोर्ट से पहले कहां शिकायत की जा सकती है - CrPC SECTION-147

सार्वजनिक धार्मिक स्थल, सार्वजनिक संपत्ति होते हैं। मंदिर का पुजारी अथवा प्रबंधन समिति किसी का प्रवेश वर्जित नहीं कर सकती परंतु कई विवाद सामने आए हैं जिनमें महिलाओं का या फिर वर्ग विशेष का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। बाद में हाई कोर्ट अथवा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्थिति सामान्य हुई। सवाल यह है कि क्या हर मंदिर के मामले में हाई कोर्ट में याचिका लगानी पड़ेगी या फिर कोई सरल रास्ता भी है।

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 147 उस क्षेत्र के कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SDM) को यह अधिकार देती है कि वह ना केवल विवाद की सुनवाई करें बल्कि निराकरण भी करें। पीड़ित पक्ष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने स्वयं उपस्थित होकर बिना किसी वकील की मदद के आवेदन दे सकता है एवं अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

कार्यपालक मजिस्ट्रेट मंदिर के पुजारी अथवा प्रबंधन समिति को नोटिस जारी करके तलब करेंगे और दोनों पक्षों की बात को सुनने के बाद मामले का निराकरण करेंगे। क्योंकि ऐसे मामलों में संपत्ति पर किसी का व्यक्तिगत अधिकार नहीं होता और ना ही संपत्ति के स्वरूप को बदला जाता है बल्कि उसके सार्वजनिक उपयोग को मनमाने तरीके से नियमबद्ध किया जाता है इसलिए ऐसे विवाद का निराकरण करने हेतु कार्यपालक मजिस्ट्रेट के लिए सक्षम प्राधिकारी है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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