यदि किसी की निजी संपत्ति को न्यूसेंस बता दिया गया हो तो मजिस्ट्रेट क्या करेगा - LEARN CrPC SECTION 136


दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-133 के अंतर्गत किसी ऐसे व्यक्ति को आदेश दिया गया है, जिसकी संपत्ति के कारण पब्लिक पैलेस में बाधा उत्पन्न हो रही है एवं कार्यपालक मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति को अपने बुलाता है और वह व्यक्ति के स्वीकार करता है कि जिस स्थान से लोगों को परेशानी हो रही है वह लोक-अधिकार में नहीं है वह मेरा निजी स्थान है अर्थात किसी व्यक्ति ने मकान बनाने के लिए खाली स्थान पर गिट्टी, पत्थर, रोड़ा आदि रख दिए उसके कारण लोगों को बाधा उत्पन्न हो रही है तब व्यक्ति यह कह सकता है कि जो उपर्युक्त सामान मेरी स्वंय की निजी भूमि में रखे गए हैं तब ऐसी स्थिति में कार्यपालक मजिस्ट्रेट क्या कर सकता है जानिए।

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 137 की परिभाषा:-

1. अगर कोई व्यक्ति कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर यह साक्ष्य प्रस्तुत करता है कि  कोई मार्ग, नदी, जलसरणी या स्थान जिसके कारण लोक बाधा उत्पन्न हो रही है वह उसका निजी स्थान हैं, एवं यह किसी भी प्रकार से लोक अधिकार में नहीं आता है तब मजिस्ट्रेट उस स्थान की जाँच करवा सकता है।

2. अगर जाँच में यह पता चलता है कि व्यक्ति द्वारा की गई बात सत्य है तब कार्यपालक मजिस्ट्रेट ऐसी कार्यवाही को रोक देगा एवं मामले को सिविल न्यायालय भेज देगा एवं जब तक सिविल न्यायालय कोई आदेश नहीं देगा तब तक आगे कोई कार्रवाई नहीं करेगा।

3. अगर व्यक्ति किसी स्थान को लोक अधिकार मानने से इनकार करता है और अपने पक्ष में कोई विश्वसनीय साक्ष्य पेश दे पाता है तब उसके द्वारा दिया गया बयान वही माना जाएगा जो पहले कहा गया था बाद में इसे बदलने का उसे कोई अधिकार नहीं होगा।  :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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