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INDORE NEWS- संतोष वर्मा आईएएस रिमांड पर, पढ़िए किन सवालों के जवाब बाकी है

इंदौर
। पुलिस ने कोर्ट के फर्जी आदेश लगाकर प्रमोशन पाने के मामले में संतोष वर्मा आईएएस को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन जांच यहां तक नहीं हुई बल्कि यहां से शुरू हो रही है। पुलिस को अभी यह पता लगाना बाकी है कि इस मामले में संतोष वर्मा के साथ कौन-कौन शामिल है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब न्यायधीश छुट्टी पर थे उस दिन कोर्ट का आदेश कैसे जारी हुआ और क्या कोर्ट के कुछ कर्मचारी भी इस मामले में शामिल हैं। एक अन्य बड़ा प्रश्न यह भी है कि क्या केवल एक ही आदेश फर्जी निकला है या फिर इस तरह का फर्जीवाड़ा चलता रहता है। पुलिस ने संतोष वर्मा को 14 जुलाई तक के लिए रिमांड पर ले लिया है।

इंदौर में कोर्ट का फर्जी आदेश, कोर्ट में तैयार हुआ था या बाहर

कोतवाली सीएसपी हरीश मोटवानी के मुताबिक कुछ कोर्ट कर्मियों के बीच की वाट्सऐप चैटिंग भी सामने आई है। मामले में कोर्ट कर्मचारी कुश हार्डिया, महेश भाटी और नीतू चौहान के बयान भी लिए गए हैं। तीनों से कोई खास जानकारी नहीं मिली है, लेकिन प्रधान लिपिक पुरोहित ने स्पष्ट कर दिया है कि संतोष वर्मा ने ही नकल आवेदन पेश किया था। उसने कंप्यूटर में एंट्री दर्ज की और न्यायाधीश विजेंद्र सिंह रावत की ओर से डायरी प्राप्त कर वर्मा को नकल दी। इसे साफ हो गया है कि फर्जी आदेश बनने में कोर्ट कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है। सूत्रों की माने तो कोर्ट द्वारा जारी गए फर्जी दस्तावेज में फॉरेंसिक जांच होना बाकी है। अब अक्षरों (font) का मिलान भी किया जाएगा, इससे साफ हो जाएगा कि कोर्ट आदेश किस जगह तैयार हुआ है।

मात्र 3 दिन में सब कुछ हो गया

सूत्रों की माने तो 6 अक्टूबर को जज विजेंद्र सिंह रावत द्वारा यह जजमेंट दिया जाना बताया गया है, उस दिन जज अवकाश पर थे। आदेश की सर्टिफिकेट कॉपी 7 अक्टूबर को कोर्ट से निकलना बताई गई है, वह संतोष वर्मा ने 8 अक्टूबर को यह कॉपी भोपाल में पेश कर दी थी।

इस मामले के लिए बनाया फर्जी आदेश

लसुडिया थाने में युवती ने शिकायत की थी। शिकायत में उसने कहा था कि उज्जैन के अपर कलेक्टर संतोष वर्मा ने शादी का झांसा देकर उन्हें साथ रखा और ज्यादती की। उसने संतोष के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की थी। इसी दौरान दोस्ती हुई, जो प्रेम में बदल गई। संतोष वर्मा ने इस मामले में केस खत्म होने का फर्जी आदेश तैयार करवाया था।

एक और मामले में भी ऐसा किया

हर्षिता अग्रवाल ने एमजी रोड पुलिस और आईजी को भी एक आवेदन दिया है। इसमें आरोप है कि उज्जैन में अपर कलेक्टर रहने के दौरान वर्मा ने एक्सिडेंट करवाकर उसे मारने की कोशिश की थी। शिकायत उज्जैन के एक थाने में दर्ज करवाई थी, लेकिन वहां भी उन्होंने अपने केस में फर्जीवाड़ा कर खुद को निर्दोष बता रखा है। यह शिकायत और थाने की चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट भी उन्होंने आईएएस काडर लेने में छिपाई है।

क्यों बनाया फर्जी आदेश 

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल करने से पहले सभी स्तर पर जांच पड़ताल की जाती है। इस दौरान यह भी पता किया जाता है कि संबंधित अधिकारी का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड तो नहीं है। जिन अधिकारियों की भ्रष्टाचार के मामले में जांच चल रही होती है अथवा किसी भी प्रकार का क्रिमिनल रिकॉर्ड होता है उन्हें आईएएस अवार्ड नहीं किया जाता। पुलिस का कहना है कि प्रमोशन पाने के लिए आरोपी संतोष वर्मा ने फर्जी आदेश बनाया।

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