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क्या सरकार आजीवन कारावास से दंडित कैदी की सजा कम कर सकती है - LEARN IPC SECTION 55

पिछले लेख में भारतीय दण्ड संहिता की धारा 54 में बताया गया था कि राज्य के राज्यपाल को भारतीय संविधान अनुच्छेद 161 में एवं देश के राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 72 में किसी भी अपराध को लघुकरण करने की शक्ति प्राप्त होती है। दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 433 (ख) के अंतर्गत अगर कोई अपराधी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है तब उसे राज्य सरकार के नियम के अनुसार मृत्यु से पूर्व रिहा नहीं किया जा सकता। इसके लिए समुचित सरकार को हर कैदी के लिए उसकी सजा के लघुकरण हेतु अलग से आदेश जारी करना होगा।

भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 55 की परिभाषा:-

अगर कोई समुचित सरकार किसी अपराधी की आजीवन कारावास की सजा का लघुकरण करती है, तब न्यायालय भारतीय दण्ड संहिता की धारा 55 के अंतर्गत लघुकरण का आदेश को जारी करेगा या आदेश देगा।
नोट:- न्यायालय किसी भी आजीवन कारावास काट रहे अपराधी की सजा का लघुकरण नहीं कर सकता है यह दायत्व समुचित सरकार का है।

उधरणानुसार वाद- लक्ष्मण नास्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य- इस वाद में उच्चतम न्यायालय ने स्प्ष्ट किया कि आजीवन कारावास से अभिप्राय हैं कि शेष बचे हुए जीवन का कारावास होता है। अतः यदि किसी राज्य के नियमों में आजीवन कारावास को बीस वर्षों का कारावास माना है, तो इसका लाभ अपराधी को अपने आप नहीं मिल जाएगा जब तक कि इसके लिए समक्ष सरकार ने पृथक आदेश पारित न किया हो। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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