FIR के लिए कागज मांगने वाला सब इंस्पेक्टर सस्पेंड - INDORE NEWS

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इंदौर
। महिला की एक्सीडेंट में मौत के बाद सब इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र अवस्थी ने FIR तो दर्ज की लेकिन प्रिंट आउट नहीं दिया। पीड़ित परिवार से कहा कि बाजार से कागज लाओगे तभी प्रिंटआउट मिलेगा। इंदौर में नाइट कर्फ्यू लग जाने के बाद 10 किलोमीटर दूर एक स्टेशनरी से पीड़ित परिवार ₹25 के कागज लाया तब जाकर उन्हें FIR की कॉपी मिली। मामले का खुलासा होते ही सब इंस्पेक्टर अवस्थी को सस्पेंड कर दिया है।

महिला की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी

भंवरकुआं थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम 6 बड़े सड़क हादसे में 16 साल के बेटे के साथ पैदल जा रही कालीबाई (50) को ट्रक ने टक्कर मार दी थी। मौके पर उसकी मौत हो गई। अगले दिन पोस्टमॉर्टम करवाने पहुंचे परिजन ने पुलिस की करतूत खोली। बकौल जगदीश आर्ने 'मैं पीपल्याहाना कांकड़ में रहता हूं। कल 5:30 बजे मेरी भाभी खरगोन से इंदौर आईं। उनके साथ बेटा भी था। वे रोड क्राॅस कर रही थी, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 

एंबुलेंस नहीं आई, लाश को लोडिंग ऑटो में अस्पताल लेकर गए

भतीजे ने काफी समय बाद फोन लगाया। कहा कि काका तीन इमली चौराहे पर मां की मौत हो गई है। मैं तत्काल पहुंचा। मैंने देखा कि शव वहीं पड़ा है। फिर 100 नंबर और 108 नंबर डायल किया। कोई नहीं आया। फिर मैंने लोडिंग में ही भाभी का शव रखवाया। जिला अस्पताल पहुंचाया। करीब एक से डेढ़ घंटे तक शव वहीं पड़ा रहा। यह पुलिस और प्रशासन की लापरवाही है। वहां मौजूद लोग यह सब देख रहे थे। 

सब इंस्पेक्टर ने कहा बाजार से कागज लाओ तभी FIR की कॉपी मिलेगी

फिर हम रात 8- 8:30 बजे थाने पहुंचे। वहां पुलिस के दो स्टार थानेदार थे। उन्होंने कहा, हमने रिपोर्ट तो लिख ली है, लेकिन वो कम्प्यूटर पर ही है। उसका प्रिंट नहीं निकलेगा, क्योंकि थाने पर सफेद कोरे ताव (कागज) नहीं हैं। मैंने कहा कि साहब इतना बड़ा भंवरकुआं थाना है, क्या एक भी ताव नहीं मिलेगा, तो उन्होंने मना कर दिया। फिर मैंने पूछा कहां मिलेंगे। वो बोले, थाने के सामने चले जाओ, दो-तीन दुकानों पर खोज लो। बाहर देखा, तो लॉकडाउन के कारण रात 9 बजे दुकानें ही बंद हो गई थीं। फिर मैं क्या करता। 

नाइट कर्फ्यू के कारण बाजार बंद था, डेढ़ किलोमीटर दूर एक दुकान मिली

मैं एक-डेढ़ किलोमीटर आगे तक गया। तब टॉवर चौराहे के आगे दुकान खुली दिखी। वहां से 25 रुपए के कागज खरीदे। फिर थाने पहुंचकर दिए। तब कहीं जाकर FIR दर्ज हुई। शुक्रवार भी दोपहर का 1 बज चुका है। मैं और मेरा परिवार यहीं जिला अस्पताल में बैठा रहा। साहब हम गरीब जरूर हैं, मानवता क्या होती है, समझते हैं। ऐसे समय तो पुलिस और प्रशासन को कार्रवाई जल्दी करवा देना चाहिए। हमें पता है कि हमारी पहुंच नहीं है, इसलिए सब हो रहा है। वरना, कोई बड़ा आदमी मरता, तो पुलिस दौड़-दौड़कर काम करती।

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