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भारत के सैनिकों को भड़काना या कर्तव्य से विचलित करना: IPC की किस धारा के तहत FIR दर्ज होगी, यहां पढ़िए -ASK IPC

भारत देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए 3 सेनाएं सीमा पर 24 घंटे तैनात रहती है। भारत के सैनिक सीमाओं की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने में कोई संकोच नहीं करते। हिमालय की बर्फीली पहाड़ियों से लेकर राजस्थान के कटीले रेगिस्तान तक समान भावना के साथ देश की रक्षा करते हैं। ऐसी स्थिति में यदि कोई भारत के सैनिकों को भड़काने की कोशिश करता है या फिर उनके कर्तव्य पालन को बाधित करने की कोशिश करता है तो फिर उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता में किस तरह की दंड का प्रावधान किया गया है। कृपया ध्यानपूर्वक पढ़िए:-

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 131 की परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति भारतीय सेना, नेवी, एयर फोर्स के सैनिको के साथ निम्न कृत्य करेगा-
1. सैनिकों को अपने कर्तव्य से विचलित करेगा। 
2. उनको युद्ध करने के लिए उकसाएगा।
3. सैनिको को अपने वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध विरोध करने के लिए भड़कायेगा।
(इस धारा में भड़काना या उकसाना मात्र को ही दाण्डित मना है)

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 131 के अंर्तगत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं है, यह संज्ञेय एवं अजमानतीय अपराध होते हैं। इनकी सुनवाई का अधिकार सत्र न्यायालय को होता है। सजा- इस अपराध के लिए आजीवन कारावास या दस वर्ष की कारावास एवं जुर्माने से दाण्डित किया जा सकता है। 
नोट:- अगर कोई व्यक्ति सैनिकों को प्रकाशन या प्रेस के माध्यम से युद्ध के लिए भड़काता है तब वह इस धारा के अंतर्गत दंडनीय नहीं होगा।

:- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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