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पुलिस अधिकारी को थाने की सीमा से बाहर गिरफ्तारी का अधिकार किसने दिया- ASK CrPC

भारत में अपराध, अपराधी और पुलिस को थानों की सीमाओं में बांधा गया है। FIR उसी थाने में लिखी जाती है जिस थाने के क्षेत्र में अपराध हुआ होता है। अगर मामला अति गंभीर है तब अन्य क्षेत्र के थाने में प्रकरण क्रमांक जीरो पर FIR करके संबंधित थाने को जांच करने के लिए भेज दी जाती है लेकिन अगर कोई अपराधी अपराध करके भारत के अन्य क्षेत्र या शहर में भाग जाए तो पुलिस अधिकारी थाना प्रक्रिया को भूलकर बिना वारंट के भारत के किसी भी हिस्से से उसे गिरफ्तार कर लाते हैं। सवाल यह है कि यदि प्रकरण दर्ज करने के लिए थाने निर्धारित हैं तो फिर गिरफ्तारी के लिए भी होने चाहिए। जानिए वह कौन सा कानून है जिसने पुलिस अधिकारी को भारत के किसी भी क्षेत्र में अपराधी को गिरफ्तार करने का अधिकार दिया।

दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 48 की परिभाषा:- 

सीआरपीसी (दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973) ने पुलिस को कई प्रकार के अधिकार दिए हैं और कर्तव्य भी निर्धारित किए हैं। किसी भी पुलिस अधिकारी को ऐसे किसी व्यक्ति को जिसे गिरफ्तार करने के लिए वह प्राधिकृत है। वह बिना वारण्ट या वारण्ट के साथ भारत में कही भी उसका पीछा कर सकता है एवं उसे भारत में कही भी गिरफ्तार कर सकता है।

उधरणानुसार:- अगर कोई लुटेरे लूट करके किसी अन्य राज्य की और भागे तब कोई भी पुलिस अधिकारी बिना वारण्ट के उनका पीछा कर सकते हैं, और भारत के किसी भी स्थान से लूटेरों को गिरफ्तार कर सकते हैं। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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