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आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए विशेष पैकेज की घोषणा: PM MODI @ CORONA and LOCKDOWN

आदर पूर्वक नमस्कार, कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को अब 4 महीने से ज्यादा समय बीत गया है। इस दौरान तमाम देशों के 42 लाख से ज्यादा लोग कोरोनावायरस से बीमार हुए और पौने तीन लाख से ज्यादा लोगों की दुखद मृत्यु हुई। भारत में भी अनेक परिवारों ने अपने स्वजन खोए हैं। मैं सभी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 12 मई को रात 8 बजे भारत देश को संबोधित कर रहे थे।

यही रास्ता है आत्मनिर्भर भारत

साथियों एक वायरस ने दुनिया को तहस-नहस कर दिया है। विश्व भर में करोड़ों जिंदगी संकट का सामना कर रहे हैं। सारी दुनिया जिंदगी बचाने में एक प्रकार से जंग में जुटी है। हमने ऐसा संकट देखा है ना ही सुना है। निश्चित तौर पर मानव जाति के लिए यह सब कुछ अकल्पनीय है। यह क्राइसिस अभूतपूर्व है, लेकिन थकना, हारना, टूटना, बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है। सतर्क रहते हुए, जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी। 

आज जब दुनिया संकट में है तब हमें अपना संकल्प और मजबूत करना होगा हमारा संकल्प इस संकट से भी विराट होगा। कोरोना दुनिया में जो स्थितियां बन रही हैं उसे भी हम निरंतर देख रहे हैं। जब दोनों काल खंडों को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है 21वीं सदी भारत की हो यह हमारा सपना ही नहीं यह हम सभी की जिम्मेदारी दी है। इसका मार्ग एक ही है आत्मनिर्भर भारत। 

विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंता आशा की किरण नजर आता है

साथियों एक राष्ट्र के रूप में आज हम बहुत महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। इतनी बड़ी आपदा भारत के लिए एक संकेत लेकर आए हैं। एक संदेश लेकर आई है। एक अवसर लेकर आई है। संकट के शुरू में भारत में एक भी पीपीई किट नहीं थी। आज भारत में ही हर रोज 200000 पीपीई किट बनाई जा रही है। यह हम इसलिए कर पाए क्योंकि भारत ने आपदा को अवसर में बदल दिया। आपदा को अवसर में बदलने की भारत की दृष्टि आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकट के लिए उतनी ही प्रभावी सिद्ध होने वाली है। साथियों आज विश्व में आत्मनिर्भर शब्द के मायने पूरी तरह बदल गए है। ग्लोबल वर्ल्ड में आत्मनिर्भरता की डेफिनेशन बदल रही है। अर्थ केंद्रित वैश्वीकरण बनाम मानव केंद्रित वैश्वीकरण की चर्चा आज जोरों पर है। विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंता आशा की किरण नजर आता है। 

अपनी क्वालिटी और बेहतर करेंगे, सप्लाई चैन को और आधुनिक बनाएंगे

भारत जब समृद्ध था। सोने की चिड़िया कहा जाता था। संपन्न था। तब सदा विश्व के कल्याण की राह पर ही चला। वक्त बदल गया। गुलामी की जंजीरों में जकड़ गया। हम विकास के लिए तरसते रहे। आखिर भारत विकास की ओर सफलतापूर्वक कदम बढ़ा रहा है। तब भी विश्वकल्याण की राह पर अटल है। याद करिए इस शताब्दी की शुरुआत के समय y2k संकट आया था। भारत के टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट्स ने दुनिया को संकट से निकाला। आज हमारे पास साधन हैं। हमारे पास सामार्थ्य है। हमारे पास दुनिया की सबसे बेहतरीन टैलेंट है। हम बेस्ट बनाएंगे। अपनी क्वालिटी और बेहतर करेंगे। सप्लाई चैन को और आधुनिक बनाएंगे। यह हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे।

2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए 20 लाख करोड़ रुपए 

मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। यह आर्थिक पैकेज, आत्मनिर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। यह करीब करें 20 लाख करोड़ रुपए का है। यह पैकेज भारत की जीडीपी का करीब करीब 10% है। ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है।

इन पांच पिलर्स पर खड़ा होकर नया भारत

पीएम मोदी ने कहा, 'आत्मनिर्भर भारत की ये भव्य इमारत, पाँच पिलर्स पर खड़ी होगी। पहला पिलर Economy एक ऐसी इकॉनॉमी जो Incremental change नहीं बल्कि Quantum Jump लाए । दूसरा पिलर Infrastructure एक ऐसा Infrastructure जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर- हमारा System- एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति-नीति नहीं, बल्कि 21वीं सदी के सपनों को साकार करने वाली Technology Driven व्यवस्थाओं पर आधारित हो। चौथा पिलर- हमारी Demography- दुनिया की सबसे बड़ी Democracy में हमारी Vibrant Demography हमारी ताकत है, आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है। पाँचवाँ पिलर- Demand- हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई चेन का जो चक्र है, जो ताकत है, उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है।'

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