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न्यूनतम वेतन अधिनियम क्या है, ओवरटाइम का प्रावधान क्या है, पढ़िए The Minimum Wages Act, 1948

भारत सरकार सभी व्यक्ति के हितों को ध्यान में रखकर कोई भी कानून बनाती है। आज हम जिस क़ानून की बात कर रहे है वह छोटे मजदूरों, कुशल, अकुशल,असंगठित श्रमिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होता है। क्योंकि इस महंगाई के दौरान में अगर एक मजदूर को कंपनियों, कारखानों, ओधोगिक संस्था द्वारा न्यूनतम पैसों का भुगतान नहीं किया जाए तो महंगाई के दौर में अपना और परिवार का जीवन पालना मुश्किल हो जाएगा। 

न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 की परिभाषा (संक्षिप्त एवं सरल अर्थों में):-

अगर कोई कर्मचारी(कुशल, अकुशल, असंगठित श्रमिक सभी प्रकार के) से सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन पर काम नहीं करवाता है, या 12 घण्टे से ज्यादा काम लेता या ओवरटाइम का भुगतान नहीं करता, वेबजह वेतनमान में कटौती करता है। तब वह व्यक्ति जिसका वेतन काट रहा है या न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है वह अधिनियम की धारा 20(1),20(2) के अंतर्गत श्रमायुक्त को शिकायत कर सकता है।

नोट - (ऐसे कारखाने, कंपनियां, ओधोगिक संस्था, कृषि संस्था, शैक्षणिक संस्थान आदि में कम से कम 1000 से कम कर्मचारी, मजदूर होना आवश्यक है)

नियोजक का दायित्व
अधिनियम की धारा 12 एच. आर. एवं कम्पनी के संचालक, नियोजक, ठेकेदार को दायित्व देते हैं कि वह कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन का भुगतान करे एवं न्यूनतम वेतन से कम भुगतान न करे। धारा -13 कर्मचारियों को सप्ताह में एक अवकाश दे। धारा - 14 के अनुसार वह निर्धारित कार्य घण्टे से अधिक कार्य घंटे हो जाने पर ओवर टाइम का भुगतान सामान्य वेतन दरों से दुगना होगा।

न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान

अगर श्रमिको को नियोजक द्वारा न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है या ओवर टाइम काम करवाने के बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है तब ऐसे कर्मचारी स्वयं या विधि के ज्ञाता के साथ जाकर 6 माह के पूर्व अपनी शिकायत श्रमायुक्त तक भेज सकते हैं। सजा- अधिनियम की धारा 22,22(क), 22(ख), के अनुसार 500 रु जुर्माना से छः माह तक का कारावास हो सकता है।

प्रमुख वाद:-
1. यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइटस बनाम यूनियन ऑफ इंडिया(1982)-सुप्रीम कोर्ट ने कहाँ की श्रमिकों से बलपूर्वक कार्य लेना एवं न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया जाना बंधुआ श्रमिकों की परिधि में आता है। 

2. विजय काटन मिल्स लिमिटेड बनाम स्टेट ऑफ अजमेर(1995):- न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया कि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कर्मचारियों को न्यूनतम भुगतान नहीं किया जाना एक अपराधिक उल्लंघन होता है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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