नवीन कृषि कानून संवैधानिक हैं या नहीं, पढ़िए भारत के संविधान में क्या लिखा है - Indian constitution

Bhopal Samachar
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भारत देश में इन दिनों नवीन कृषि कानून को लेकर काफी मतभेद सामने आ रहे हैं। इस दौरान एक दवा यह भी किया गया है कि नवीन कृषि कानून असंवैधानिक है। केंद्र को कृषि कानून बनाने का अधिकार ही नहीं है। भारत के संविधान में कृषि उपज के विपणन हेतु कानून बनाने का अधिकार राज्य को दिया है। यहां अपन इस बात पर चर्चा नहीं करेंगे कि कानून सही है या गलत है परंतु इस बात पर चर्चा करेंगे कि नवीन कृषि कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को है या नहीं। यदि है तो यह अधिकार केंद्र सरकार को कब और किसने दिया:-

भारतीय संविधान अधिनियम,1950 की सातवीं अनुसूची की परिभाषा:-

भारतीय संवाद की सातवीं अनुसूची में तीन सूचियां हैं।
1. संघ सूची:- संघ सूची में केवल केन्द्र की सरकार 97 विषयों पर कानून बना सकती है। 
2. राज्य सूची:- राज्य सूची में केवल राज्य के विधानमंडल ही 66 विषयों पर कानून बना सकते हैं।
3. समवर्ती सूची:- केंद्र सरकार एवं राज्यों को सरकार मिलकर समवर्ती सूची में 47 विषयों पर कानून बना सकते है।

अब प्रश्न यह आता है कि वर्तमान कृषि कानून किस सूची में आता है?

अगर हम राज्य सूची की बात करें तो विषय क्रमांक 14, कहता है कि राज्य विधानमंडल कृषि जिसके अंतर्गत कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान, कृषि नाशक जीवों से संरक्षण और पादक रोगों का निवारण पर कानून बना सकते हैं। 
राज्य सूची के विषय 26 एवं 27 समवर्ती सूची के विषय 33 के उपबंधों के अधीन रहते हुए राज्य के भीतर व्यापार और वाणिज्य की बात करते हैं एवं माल का उत्पादन, और प्रदाय और वितरण के नियमों के अधीन है।

इस बात से यह स्प्ष्ट होता हैं कि संविधान के तीसरे संशोधन के अनुसार 1954 में कृषि विधेयक पर कानून बनाने का अधिकार समवर्ती सूची के विषय 33 के अंतर्गत संसद काननू बना सकती है।  जानिए समवर्ती सूची का 33 वाँ विषय:-

निम्न कानून 
1. खाद्य पदार्थों पर जिनके अंर्तगत खाद्य तिलहन और तेल आते हैं।
2. पशुओं के चारों पर जिनके अन्तर्गत खली ओर अन्य सारकृत चारे आते हैं।
3. कोई भी कच्ची कपास कैसी भी हो।
4. कच्चे जुट।
व्यापार और वाणिज्य तथा उनका उत्पादन, प्रदाय और वितरण पर।

सामान्य शब्दों में कहा जाए कि संविधान के तीसरे संशोधन 1954 द्वारा संसद समवर्ती सूची के अंतर्गत कृषि कानून बिल बना सकती है।

अब बात करे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246-क की यह संविधान संशोधन 2016 में लागू किया गया था। यह कहता है कि संसद एवं राज्य की विधानमंडल को किसी माल और सेवा कर लगाने से संबंधित विधि बनाने का अधिकार प्राप्त है एवं जहाँ माल या सेवा या दोनों का प्रदाय अंतरराज्यीय व्यापार या वाणिज्य में होता हैं वहाँ माल और सेवा कर के विषय में संसद को विधि निर्माण की शक्ति होगी।

अब प्रश्न यह आता है कि क्या केंद्र सरकार समवर्ती सूची के अंतर्गत कोई कानून बनाती है तो राज्य की सरकार उसे संशोधन कर सकती है?
इस प्रश्न के जबाव के लिए हमको भारतीय संविधान के अनुच्छेद 254 की समझना होगा इस अनुच्छेद को हम सरल शब्दों में समझते हैं:

1. अगर कोई राज्य का विधानमंडल समवर्ती सूची के अंतर्गत केंद्र सरकार से पहले या बाद में तब राज्य का ऐसा कानून केंद्र सरकार के कानून के सामने शून्य मना जाएगा एवं केंद्र सरकार का कानून लागू होता।

लेकिन समवर्ती सूची के अंतर्गत केंद्र सरकार के बने कानून को राज्य सरकार को संशोधन करके अपने राज्यों में लागू करना होगा तो उसे उस कानून को  राष्ट्रपति के पास भेजना होगा अगर राष्ट्रपति अनुमति देते हैं तब वह संशोधित कानून राज्य में लागू होगा। तब तक जब तक केंद्र सरकार उस कानून को दुवारा संशोधित नहीं करती।

उपर्युक्त लेख द्वारा हम कह सकते हैं कि भारत सरकार द्वारा लाया गया कृषि कानून संवैधानिक कानून है जो समवर्ती सूची के विषय से बनाया गया है। एवं इस कानून पर राज्य सरकार या राज्यों की विधानमंडल अपने अनुसार संशोधन कर सकती है जो कि केन्द्र सरकार ने कह दिया हैं। बहुत से लोगो ने इस कानून को असंवैधानिक कहा है वह गलत है कृषि कानून असंवैधानिक नहीं है। यह एक संवैधानिक कानून हैं। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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