DIGITAL ADDICTION: अपनी जांच और इलाज खुद करें

Bhopal Samachar
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शक्ति रावत।
दुनिया में कोरोना महमारी आई यह तो सभी ने देखा लेकिन इसके साथ-साथ और कितनी बीमारियां आईं हैं, क्या इसका अंदाजा है, आपको अगर नहीं तो मिलिये पहली मुसीबत नीमोफोबिया से जिसकी शुरूआती स्टेज को डिजिटल एडिक्शन कहा जाता है। हालांकि इस बीमारी की शुरूआत तो कोरोना से पहले ही हो गई थी, लेकिन कोरोनाकाल में इस नई महामारी को भी फलने-फूलने का मौका मिला है। 

कोरोनाकाल में दिल्ली एम्स द्वारा कराए गए सर्वे के आंकड़े बताते हैं, कि देश में लॉकडाउन के दौरान डिजीटल एडिक्शन के मरीज 4 गुना तक बढ़ गए हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या बच्चों और युवाओं की है। क्योंकि पिछले 8 महीनों में स्क्रीन टाइम बढ़ा है, और लोगों ने महामारी के दौर में स्मार्ट फोन या डिजिटल स्क्रीन को ही अपना साथी बना लिया। इस मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं, वे भी अपना 40 प्रतिशत से ज्यादा समय स्क्रीन पर बिता रहीं हैं। 

हमारी जीवनशैली से जुड़ी यह बीमारी पूरी तरह से इंसान ने खुद ही पैदा की है। लेकिन नतीजे बहुत गंभीर आने वाले हैं। युवाओं में यह अनिद्र, अवसाद और गुस्से के तौर पर दिख रहे हैं, तो वहीं बच्चों में जिद्दीपन, फोकस में कमी, व्यवहार में बदलाव, नींद में डरना और दिनचर्या बिगडऩे जैसी चीजों के तौर पर सामने आ रहे हैं।

ऐसे जाने आप डिजीटल एडिक्टि तो नहीं-

-स्मार्ट फोन स्क्रीन को लेकर लगातार तलब बनी रहे। एक बार फोन, लैपटॉप या टैबुलेट उठा लेने के बाद बंद करने में समस्या हो, बार-बार स्क्रीन ऑन करने की इच्छा बनी रहती है।
-यह जानते हुए कि, दिनचर्या और आपका जीवन प्रभावित हो रहा है, खेलने, सोने कहीं आने-जाने जैसे कामों में देरी हो रही है। फिर भी आप मोबाइल नहीं छोड़ पा रहे हैं।
-रात में नींद से उठकर या सुबह जागने पर सबसे पहले मोबाइल की तरफ भागते हैं, मतलब आप डिजिटल एडिक् शन के शिकार हो चुके हैं। यह भी देखें कि, आप दिन में कितने घंटे मोबाइल पर बिता रहे हैं। 2 या 3 घंटे से ज्यादा का समय एडिक् शन की श्रेणी में आता है।

और डिजीटल एडिक्शन का ऐसे करें इलाज-

-एडिक्शन से बचने के लिए अभी से कठोर नियम बनाईये। एक बार में 30 मिनिट से ज्यादा किसी भी हालत में स्क्रीन के सामने ना रहें। अगर काम की मजबूरी में इससे ज्यादा रहना पड़े तो हर 30 मिनिट में ब्रेक लेना जरूरी है।
-हर 30 मिनिट के अंतराल पर पलकों को 10 से 20 बार जरूर झपकायें। और गर्दन को लेफ्ट-राइट व अप-डाउन करें, कम से कम 20 बार।
-हाथों की कलाईयों को भी इतनी ही बार क्लॉक वाइस और एंटी क्लॉक वाइस घुमाएं।
-रात को सेल फोन स्वीस ऑफ करें, संभव नहीं तो साइंलेंट या वाइव्रेट मोड पर रखें। बार-बार फोन चैक करने की आदत को कम करना शुरू करें।
-हर रोज 10 मिनिट हरियाली को देखने का नियम बनायें। अपने ध्यान को मोबाइल की जगह दूसरे कामों या चीजों पर डायवर्ट करें।
-काम के बीच में कभी भी फोन चैक करने की आदत बंद करें। अपने कामों को समय पर पूरा करने के लिए दिनचर्या बनाएं, और उसी के मुताबिक काम करने की आदत बनायें। -लेखक मोटीवेशनल स्पीकर और लाइफ मैनेजमेंट कोच हैं।

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