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LIC एजेंट लक्ष्मण दास भारत के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में शामिल - INSPIRATIONAL STORY WITH MORAL

पंजाब का एलआईसी एजेंट लक्ष्मण दास मित्तल भारत के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में शामिल हो गया है। IIFL WEALTH HURUN INDIA RICH LIST 2020 में कुल 828 करोड़पतियों को जगह मिली है। इस लिस्ट में केवल उनका नाम शामिल किया जाता है जिनकी संपत्ति 1000 करोड़ से ज्यादा होती है। लक्ष्मण दास मित्तल का नाम 164 नंबर पर है। नंबर वन पर मुकेश अंबानी। 2- हिंदूजा ब्रदर्स, 3- शिव नादर, 4- गौतम अडानी, 5- अजीम प्रेमजी का नाम है।

लक्ष्मण दास मित्तल कौन है, LIC एजेंट एक करोड़ की संपत्ति का मालिक कैसे बन गया

सोनालिका ग्रुप के चेयरमैन लक्ष्मण दास मित्तल आज देश के 164वें सबसे अमीर शख्स हैं। 89 साल के लक्ष्मण दास मित्तल की जिंदगी बेहद संघर्ष भरी रही है। पंजाब के होशियारपुर के रहने वाले लक्ष्मण दास मित्तल ने अपने करियर की शुरुआत एलआईसी एजेंट के रूप में की। 1962 में उन्होंने थ्रेसर बनाना शुरू किया। इस धंधे में कड़ा कंपटीशन था। लक्ष्मी दास मित्तल के पास ना तो कोई खास टेक्निक थी और ना ही एक्सपीरियंस इसलिए मित्तल का थ्रेसर का धंधा बंद हो गया। बिजनेस में घाटे की वजह से लक्ष्मण दास मित्तल ने अपने पिता को रोते हुए देखा। जिसके बाद उन्होंने फिर से थ्रेसर बनाने का काम शुरू किया। कहते हैं ना कि सफलता की गारंटी दो चीजों पर टिकी होती है, या तो जिंदगी के लिए जरूरी हो या जिंदगी की सबसे बड़ी मजबूरी हो। 

लक्ष्मण दास मित्तल के लिए थ्रेसर का धंधा जिंदगी के लिए जरूरी हो गया था, इसलिए सफलता भी मिली। सन 1969 में लक्ष्मण दास मित्तल ने सोनालिका ग्रुप की नींव रखी। संघर्ष अभी भी खत्म नहीं हुआ है। सोनालिका ट्रैक्टर, भारत के सबसे लोकप्रिय ट्रैक्टर की लिस्ट में तीसरे नंबर पर आता है। टॉप पर जाने के लिए बड़ी लड़ाई बाकी है। लेकिन एक सुखद मोड आया है। पंजाब का एलआईसी एजेंट लक्ष्मी दास मित्तल अब भारत के सबसे अमीर लोगों में से एक है।

MORAL OF THE STORY 

सफलता के लिए रिश्तो में भावनाएं और ईमानदारी जरूरी है। क्योंकि यही भावनाएं आपको परिस्थितियों से जूझने और लंबी रेस में दौड़ने की शक्ति प्रदान करती है। यदि लक्ष्मण दास के पिता की आंख में आंसू ना आए होते और लक्ष्मण दास का अपने पिता से आत्मीय लगाओ ना होता तो वह कभी भी घाटे में जा चुके धंधे को फायदे में पहुंचाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। लक्ष्मण दास में कोई परिवर्तन नहीं आया लेकिन पिता के आंसुओं ने लक्ष्मण दास को सफलता के शिखर तक पहुंचा दिया।

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