तीसरी संतान मामले में सिंगरौली का एक अधिकारी बर्खास्त, सीएम की घोषणा लागू नहीं

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 12 जून 2026
: 10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के आधार पर तीसरी संतान मामले में सिंगरौली के एक अधिकारी को बर्खास्त कर दिया गया। इस मामले को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा 9 जून 2026 को की गई घोषणा का उल्लंघन माना जा रहा है परंतु यहां स्पष्ट कर देना जरूरी है कि इस तरह के मामलों में मुख्यमंत्री की घोषणा लागू नहीं होती है। 

Singrauli Officer Dismissed Over Third Child Rule, CM’s Announcement Not Applicable

आईजी पंजीयन अमित तोमर ने सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। दरअसल, अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिकायत की गई थी कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ है। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था।

अधिकारी की दलील खारिज
जवाब में पवन परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी। वैसे भी नियमों की जानकारी व्यक्तिगत तौर पर नहीं दी जाती है। अधिसूचना का मतलब होता है कि सभी संबंधित व्यक्तियों को इस बात की सूचना होगी।

मुख्यमंत्री ने क्या घोषणा की थी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था। मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, लेकिन यह मान्यता सही नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून को कहा था कि मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए प्रस्तावित "दो बच्चों की अधिकतम सीमा" वाला प्रावधान लागू नहीं होगा। इसका मतलब हुआ कि सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को छूट दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जो संशोधन लागू होगा वह दिनांक 9 जून 2026 के बाद के मामलों के लिए होगा। इससे पहले के मामलों के लिए नहीं हो सकता है।

मध्य प्रदेश में तीसरी संतान का नियम क्या है

10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन व्यक्तियों की दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से किसी एक संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वे शासकीय सेवा के लिए पात्र नहीं माने जाते। परिहार का मामला इसी प्रावधान के दायरे में पाया गया। यह नियम 9 जून 2026 तक के लिए प्रभावी है। इसका मतलब हुआ की 9 जून 2026 से पहले तक, अथवा संशोधित अधिसूचना जारी होने से पहले तक तीसरी संतान के मामलों में 10 मार्च 2000 को जारी यदि सूचना के अनुसार ही कार्रवाई होगी।

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