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झूठे दस्तावेज बनाना या फर्जी पक्षकार बनना किस धारा के अंतर्गत अपराध होगा जानिए - ASK IPC

बहुत से राजस्व कार्यालय में या संपत्ति के लिए या बैंक से पैसे निकालने के लिए कई व्यक्ति फर्जी हस्ताक्षर करते हैं या कभी-कभी कोई बनाबटी दस्तावेजों का निमार्ण करके जमीन या पैसों का लेन देन भी कर देते हैं। या किसी अन्य व्यक्ति को भाई, पिता, बहन,माँ,पत्नी आदि पक्षकार बनाकर फर्जी काम करा लेते पर ऐसा करना भी एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है जानिए।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 423 की परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति बेईमानी या कपटपूर्ण भावना से निम्न कृत्य करेगा:-
1. झूठे कथन तैयार करवाना या लिखित विलेख का निर्माण करना।
2. फर्जी हस्ताक्षर करवाना या झूठे पक्षकारों को बनाना।
3. गलत तरीक़े से संपत्ति को स्थानांतरित करना या प्रतिफल के संबंध में झूठा कथन तैयार करना।
4. फर्जी या मिथ्था दस्तावेजों का निर्माण करना।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 423 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध समझौता योग्य होते हैं उस व्यक्ति से जो आपके कर्ज का लेनदार है। यह असंज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होते हैं।इनकी सुनवाई का अधिकार किसी भी मजिस्ट्रेट को होता है। सजा:- इस अपराध के लिए दो वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जा सकता है।

उधरणानुसार:-  जहाँ आरोपी ने किसी अन्य स्त्री को अपनी पत्नी बताकर राजस्व कार्यालय में जाकर पत्नी की संपत्ति को अन्य स्त्री के कथन द्वारा स्थांतरित करवा लेता हैं। यहाँ पर आरोपी पति धारा 423 का दोषी होगा।  :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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