उज्जैन के ठाकुर ने मोदी की अपील को 500 गाड़ियों के काफिले से रौंदा, पद मिलते ही नेताजी आउट ऑफ कंट्रोल

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 12 मई 2026
: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 मई को भारत के सभी नागरिकों से अपील की थी कि, पेट्रोल और डीजल का संयमित उपयोग करें। दूसरे दिन उज्जैन के ठाकुर सौभाग्य सिंह ने मोदी की अपील को 500 गाड़ियों के काफिले से रौंद दिया। श्री ठाकुर को मध्य प्रदेश सरकार ने पाठ्य पुस्तक निगम का अध्यक्ष बनाया है। मतलब अगले 2 साल तक ठाकुर साहब मध्य प्रदेश के बच्चों के लिए नैतिकता का निर्धारण करेंगे। 

Ujjain BJP Leader Draws Criticism Over 500-Vehicle Convoy Despite PM Modi’s Appeal

11 मई को जब सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अपील को देशभर में समर्थन दिया जा रहा था। लोग रणनीति बना रहे थे कि किस प्रकार अगले 1 साल तक वह सब कुछ करना है जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपनी अपील में कहा है। ठीक उसी समय उज्जैन के भाजपा नेता सौभाग्य सिंह ठाकुर लगभग 500 गाड़ियों का काफिला लेकर उज्जैन से भोपाल के लिए रवाना हुए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ठाकुर के समर्थकों द्वारा काफिले में गाड़ियों की संख्या 800 तक बताई गई है। श्री सौभाग्य सिंह ठाकुर इसी काफिले के साथ भाजपा कार्यालय भी पहुंचे, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष सहित प्रदेश कार्यालय में किसी ने भी इस बात के लिए उनको नहीं टोका। जमकर स्वागत सत्कार हुआ और उन्होंने मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। 

इंदौर-भोपाल हाईवे से लेकर शहर के आम रास्तों तक

उज्जैन से भोपाल के रास्ते में सौभाग्य सिंह ठाकुर के काफिले के कारण कई जगहों पर लंबा जाम लग गया। भीषण गर्मी में जाम के कारण वाहनों में सवार यात्री और खासकर बच्चे, बुजुर्ग परेशान होते नजर आए। भोपाल में बीजेपी ऑफिस से लेकर बोर्ड ऑफिस, डीबी मॉल के सामने से लेकर अरेरा हिल्स तक जाम लगता रहा।

भाजपा कार्यकर्ताओं को शैलेंद्र बरुआ याद आए 

भोपाल में श्री सौभाग्य सिंह ठाकुर द्वारा मचाया गया धमाल देखने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने श्री शैलेंद्र बरुआ का उदाहरण कई बार दोहराया। श्री ठाकुर से पहले, श्री बरुआ मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष थे। उनकी नियुक्ति से लेकर पूरे कार्यकाल तक कोई विवाद नहीं हुआ। जब उन्होंने पदभार ग्रहण किया तो पाठ्यपुस्तक निगम का सामान्य काम भी डिस्टर्ब नहीं हुआ था। किसी भी कर्मचारी को अपना काम छोड़कर दरवाजे तक भी नहीं आना पड़ा था। अब लोग कह रहे हैं, श्री बरुआ ने दायित्व ग्रहण किया था, श्री ठाकुर ने पद ग्रहण किया है। पार्टी एक ही है लेकिन संस्कारों में अंतर है।

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