GMC datia विभागाध्यक्ष पर 7 वर्षों की ACR खराब कर मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न के आरोप

Updesh Awasthee
भोपाल, 7 मई 2026:
सरकारी मेडिकल कॉलेज दतिया में कार्यरत एक फैकल्टी सदस्य ने विभागाध्यक्ष (HOD), प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले लगभग 7 वर्षों से उनकी वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR/APAR) को दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्रभावित किया गया, जिससे उनके कैरियर, पदोन्नति एवं आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा।

फैकल्टी सदस्य के अनुसार, लगातार प्रतिकूल टिप्पणियों एवं पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन के कारण उन्हें मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। आरोप है कि व्यक्तिगत द्वेष एवं प्रशासनिक दुर्भावना के चलते सेवा अभिलेखों का दुरुपयोग किया गया। “एक समय अपनी शैक्षणिक क्षमता एवं कार्यकुशलता के लिए पहचानी जाने वाली फैकल्टी का लगातार प्रताड़ना के कारण गंभीर अवसाद (Severe Depression) की स्थिति में पहुंच जाना स्वयं संस्थागत कार्यप्रणाली एवं प्रशासनिक वातावरण पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।”

प्रकरण में निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि विवादित ACR एवं प्रतिकूल टिप्पणियों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए तथा जांच पूर्ण होने तक ऐसे अभिलेखों को किसी भी प्रशासनिक या कैरियर संबंधी निर्णय का आधार न बनाया जाए। फैकल्टी सदस्य ने यह भी कहा कि सेवा नियमों के अनुसार किसी भी अधिकारी द्वारा पक्षपातपूर्ण अथवा हितों के टकराव की स्थिति में की गई प्रतिकूल टिप्पणी की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।

1. स्थापना काल से सेवाएं एवं पदोन्नति लाभ प्रभावित

• सहायक प्राध्यापक, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में वर्ष 2018 से, संस्थान की स्थापना काल से ही कार्यरत हैं।
• मेडिकल कॉलेज के प्रारंभिक वर्षों में पीजी एवं रेजिडेंट्स के अभाव के बावजूद उन्होंने विभागीय एवं चिकित्सीय सेवाओं में निरंतर योगदान दिया।
• लगभग 8 वर्षों की निरंतर एवं समर्पित सेवा के बाद भी उन्हें अब तक DACP अथवा अन्य पदोन्नति संबंधी लाभ प्राप्त नहीं हुए हैं।

आरोप है कि विभागाध्यक्ष द्वारा पिछले 7 वर्षों की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (ACR/APAR) दुर्भावनापूर्ण तरीके से अत्यंत निम्न ग्रेडिंग के साथ लिखी गई। उक्त प्रतिकूल एवं निम्न ग्रेडिंग के कारण उनके कैरियर उन्नयन, पदोन्नति एवं आर्थिक प्रगति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। यह भी आरोप है कि सेवा अभिलेखों का उपयोग निष्पक्ष मूल्यांकन के बजाय व्यक्तिगत दुर्भावना एवं प्रताड़ना के साधन के रूप में किया गया। प्रकरण में निष्पक्ष जांच, स्वतंत्र समीक्षा तथा विवादित ACR को पुनर्मूल्यांकन तक किसी भी सेवा लाभ को रोकने का आधार न बनाए जाने की मांग की गई है।

2. ACR संप्रेषण नियमों के उल्लंघन का आरोप

• मध्यप्रदेश शासन के दिशा-निर्देश क्रमांक F5-2/2011/1/9 एवं GAD/41/0001/2023/9/1 के अनुसार, क्लास-1 अधिकारियों की सभी ACR/APAR प्रविष्टियाँ प्रतिवेदन (प्रकटन) के बाद संबंधित कर्मचारी को अनिवार्य रूप से बताई जानी चाहिए।
• उक्त दिशा-निर्देशों के अनुसार ACR/APAR की सत्यापित प्रतिलिपि (Attested Photocopy) भी एक माह के भीतर संबंधित कर्मचारी को उपलब्ध कराई जानी आवश्यक है।
• यदि कर्मचारी ACR में दी गई ग्रेडिंग अथवा प्रतिकूल प्रविष्टियों से संतुष्ट नहीं हो, तो उसे प्राप्ति की तिथि से एक माह के भीतर प्रतिवेदन/आपत्ति प्रस्तुत करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।

आरोप है कि पिछले 7 वर्षों की ACR/APAR प्रविष्टियाँ न तो संबंधित कर्मचारी को संप्रेषित की गईं और न ही प्रतिकूल प्रविष्टियों के विरुद्ध प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। इस प्रकार की कार्यवाही मध्यप्रदेश शासन के प्रचलित दिशा-निर्देशों एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताई जा रही है।

सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय Dev Dutt vs Union of India में भी यह सिद्धांत स्थापित किया गया कि ACR/APAR की सभी प्रविष्टियाँ (चाहे वे प्रतिकूल हों अथवा सामान्य) संबंधित कर्मचारी को संप्रेषित किया जाना आवश्यक है, ताकि उसे उचित प्रतिनिधित्व का अवसर प्राप्त हो सके।

3. अनधिकृत एवं अवैध ACR प्रविष्टियों का आरोप

• मध्यप्रदेश शासन के प्रचलित दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी प्रतिवेदन अधिकारी (Reporting Officer) द्वारा अधीनस्थ कर्मचारी की ACR/APAR लिखने हेतु न्यूनतम 3 माह तक साथ कार्य करना आवश्यक होता है।
• वर्तमान विभागाध्यक्ष (HOD) द्वारा संस्थान में दिनांक 20/01/2020 को कार्यभार ग्रहण किया गया था।
• इसके बावजूद वर्ष 2019-2020 की ACR/APAR उनके द्वारा लिखी गई तथा उसमें अत्यंत निम्न ग्रेडिंग प्रदान की गई, जबकि नियमानुसार उक्त अवधि के लिए वे अधिकृत प्रतिवेदन अधिकारी नहीं थीं।

अतः वर्ष 2019-2020 की ACR प्रविष्टि अधिकार क्षेत्र से बाहर (Unauthorized) एवं नियम विरुद्ध बताई जा रही है। साथ ही,पूर्व विभागाध्यक्ष (2018 - जनवरी2020)द्वारा स्वयं यह पुष्टि की गई कि वर्ष 2018-2019 एवं 2019-2020 की अवधि में संबंधित ACR उनके द्वारा उस समय नहीं भरी गई थी। इस स्थिति में वर्ष 2018-2019 एवं 2019-2020 दोनों ACR प्रविष्टियाँ अनधिकृत प्राधिकारी द्वारा भरी गई प्रतीत होती हैं, जो विधिसम्मत नहीं मानी जा सकतीं।

उक्त परिस्थितियों में संबंधित ACR/APAR प्रविष्टियों को निरस्त (Quash) किए जाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही किए जाने की मांग उठाई गई है। यह भी कहा गया है कि नियमविरुद्ध एवं अधिकारविहीन तरीके से की गई प्रतिकूल प्रविष्टियों के आधार पर किसी कर्मचारी के कैरियर, पदोन्नति अथवा आर्थिक लाभों को प्रभावित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

4. कोरोना कालीन ACR प्रविष्टियों पर गंभीर प्रश्न

• वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 कोविड महामारी के अत्यंत चुनौतीपूर्ण काल रहे, जिसमें चिकित्सा महाविद्यालयों एवं अस्पतालों के चिकित्सकों ने अग्रिम पंक्ति (Frontline Warriors) के रूप में निरंतर सेवाएँ प्रदान कीं।
• मध्यप्रदेश शासन एवं चिकित्सा शिक्षक संघ (MTA) द्वारा भी इस अवधि में कार्यरत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान की सार्वजनिक रूप से सराहना की गई तथा उत्कृष्ट सेवाओं का उल्लेख किया गया।
• ऐसे महामारी काल में, जब अधिकांश फ्रंटलाइन चिकित्सकों को “Very Good” अथवा सकारात्मक ACR ग्रेडिंग प्रदान की गई, उसी अवधि में संबंधित फैकल्टी को अत्यंत निम्न एवं प्रतिकूल ग्रेडिंग दिया जाना गंभीर प्रश्न उत्पन्न करता है।

आरोप है कि कोरोना जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में निरंतर सेवाएँ देने के बावजूद प्रतिकूल ACR प्रविष्टियाँ दिया जाना निष्पक्ष मूल्यांकन के बजाय व्यक्तिगत दुर्भावना (Malicious Intent) को दर्शाता है। यह भी कहा गया है कि महामारी के दौरान सीमित संसाधनों एवं अत्यधिक कार्यभार के बीच सेवा देने वाले चिकित्सकों के साथ इस प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी प्रशासनिक निष्पक्षता एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।संबंधित पक्ष द्वारा मांग की गई है कि कोविड अवधि की ACR/APAR प्रविष्टियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए तथा दुर्भावनापूर्ण ग्रेडिंग को निरस्त किया जाए।

5. ACR ग्रेडिंग में दुर्भावनापूर्ण पैटर्न का आरोप

• पिछले 7 वर्षों की लगभग सभी ACR/APAR प्रविष्टियाँ एक ही प्रतिवेदन अधिकारी (Reporting Officer) द्वारा लिखी गईं।
• आरोप है कि संबंधित अधिकारी द्वारा जानबूझकर इतनी निम्न ग्रेडिंग प्रदान की गई, जिससे कर्मचारी आवश्यक “Benchmark” तक न पहुँच सके और उसका कैरियर उन्नयन, DACP एवं पदोन्नति लाभ बाधित हो जाए।
• महत्वपूर्ण तथ्य यह भी बताया गया है कि विभिन्न अवधियों में कार्यरत 3 डीन/रीव्यूइंग अधिकारियों (Reviewing Officers) ने संबंधित ग्रेडिंग से असहमति व्यक्त करते हुए ACR को अपग्रेड किया।
• इसके बावजूद मूल प्रतिवेदन अधिकारी द्वारा लगातार अत्यंत निम्न अंकन किया जाना एक सामान्य प्रशासनिक मूल्यांकन न होकर सुनियोजित प्रताड़ना (Planned Harassment) का संकेत माना जा रहा है।
• आरोप है कि बार-बार ऐसी ग्रेडिंग देना, जो समीक्षा के बाद भी न्यूनतम बेंचमार्क तक न पहुँचे, कर्मचारी के कैरियर को रोकने की पूर्वनियोजित रणनीति को दर्शाता है।
• संबंधित पक्ष का कहना है कि यदि कई वरिष्ठ समीक्षा अधिकारियों द्वारा लगातार ग्रेडिंग में सुधार किया गया, तो यह स्वयं इस बात का संकेत है कि प्रारंभिक मूल्यांकन निष्पक्ष एवं वस्तुनिष्ठ नहीं था।
• मामले में निष्पक्ष जांच कर प्रतिकूल एवं दुर्भावनापूर्ण ACR प्रविष्टियों की वैधानिक समीक्षा तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग की गई है।

6. शिकायत एवं प्रशासनिक कार्यवाही

• उपरोक्त समस्त तथ्यों एवं शिकायतों के संबंध में अपर मुख्य सचिव (ACS) कार्यालय तथा संचालक चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यालय को विधिवत शिकायत प्रस्तुत की गई।
• शिकायत प्राप्त होने के उपरांत मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कार्यालयों द्वारा तत्काल संज्ञान लिया गया।
• उपलब्ध अभिलेखों एवं संसाधनों के अनुसार, प्रकरण में उचित जांच एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु आदेश संचालक चिकित्सा शिक्षा (DME) कार्यालय को प्रेषित किए गए।
• यह तथ्य दर्शाता है कि मामला केवल व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित न होकर प्रशासनिक स्तर पर भी परीक्षण एवं जांच योग्य माना गया।
• संबंधित पक्ष द्वारा मांग की गई है कि उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच के माध्यम से ACR/APAR संबंधी अनियमितताओं, दुर्भावनापूर्ण मूल्यांकन एवं सेवा हितों को हुए नुकसान की वस्तुनिष्ठ समीक्षा की जाए।
Information Given By Dr Pranjal Nibudhe
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