नैरोबी/न्यूयॉर्क: वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अफ्रीका महाद्वीप हमारे अनुमान से कहीं अधिक तेज़ी से विभाजित हो रहा है। पूर्वी अफ्रीका के तुर्काना रिफ्ट (Turkana Rift) के नीचे पृथ्वी की पपड़ी (crust) इतनी पतली हो गई है कि यह एक महत्वपूर्ण मोड़ (critical point) पर पहुँच चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में यहां एक नया महासागर दिखाई देगा।
1. The 'Necking' Process और महाद्वीप का टूटना
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, तुर्काना रिफ्ट में "नेकिंग" (Necking) नामक एक उन्नत चरण शुरू हो गया है। आम तौर पर पृथ्वी की पपड़ी 35 किलोमीटर से अधिक मोटी होती है, लेकिन तुर्काना रिफ्ट के केंद्र में यह केवल 13 किलोमीटर रह गई है। फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि महासागर को बनने में कितना समय लगेगा। यह लाखों साल भी हो सकता है और कुछ सैकड़ो साल भी, क्योंकि हमारे वैज्ञानिकों ने इससे पहले पृथ्वी की पपड़ी को इस तरह टूटे हुए कभी रिकॉर्ड नहीं किया।
Necking क्या है
जैसे नमक के पानी की टॉफी (taffy) को खींचने पर वह बीच से पतली हो जाती है, वैसे ही टेक्टोनिक प्लेटों के खिंचाव से पृथ्वी की पपड़ी बीच में खिंचकर पतली और कमज़ोर हो गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रक्रिया अंततः एक नए महासागर के निर्माण की ओर ले जाएगी।
2. The Secret of Human Fossils
दिलचस्प बात यह है कि यही भूगर्भीय ताकतें, जो अफ्रीका को तोड़ रही हैं, इस क्षेत्र में मानव विकास के समृद्ध रिकॉर्ड के लिए भी जिम्मेदार हैं। लगभग 4 मिलियन (40 लाख) साल पहले 'नेकिंग' प्रक्रिया शुरू होने से ज़मीन धंसने लगी (subsidence)। इससे वहां तलछट (sediments) तेज़ी से जमा होने लगी, जिसने मानव पूर्वजों के अवशेषों को सुरक्षित दफनाने और संरक्षित करने के लिए आदर्श स्थितियां पैदा कीं।
शोधकर्ता क्रिश्चियन रोवन का कहना है कि तुर्काना रिफ्ट शायद इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि वहां मानवता का जन्म हुआ, बल्कि इसलिए कि वहां की भौगोलिक स्थितियों ने उनके इतिहास को सबसे अच्छी तरह संजो कर रखा।
3. Discovery of the Jurassic Boundary
एक अलग शोध में, वैज्ञानिकों ने मोज़ाम्बिक और तंजानिया के तट के पास 'रोवुमा ट्रांसफॉर्म मार्जिन' (Rovuma Transform Margin) नामक एक प्राचीन टेक्टोनिक प्लेट सीमा की पहचान की है। यह संरचना 180 मिलियन साल पहले जुरासिक काल में महामहाद्वीप गोंडवाना (Gondwana) के टूटने के दौरान बनी थी।
जब यह 500 किलोमीटर लंबी भ्रंश रेखा (fault line) सक्रिय थी, तब इसके भूकंपों ने उस ज़मीन को हिला दिया होगा जहाँ कभी डायनासोर घूमते थे।
4. Importance for the Future
डॉ. जॉर्डन फेथियन (Dr. Jordan Phethean) के अनुसार, इन खोजों से न केवल हमें पृथ्वी के भविष्य के आकार को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि यह हरित ऊर्जा (green energy) जैसे कि भूतापीय ऊर्जा (geothermal energy) के नए स्रोतों की खोज में भी सहायक होगा।
पूर्वी अफ्रीका का यह रिफ्ट सिस्टम आज वैज्ञानिकों के लिए एक 'प्राकृतिक प्रयोगशाला' बन गया है, जो हमें यह सिखा रहा है कि कैसे महाद्वीप टूटते हैं और कैसे पृथ्वी की हलचल ने हमारे अपने विकास की कहानी को संरक्षित किया है।


