भोपाल समाचार, 25 अप्रैल 2026: लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के संचालक श्री केके द्विवेदी ने कक्षा 10 हाई स्कूल एवं कक्षा 12 हायर सेकेंडरी स्कूल की दूसरी परीक्षा के लिए एक्स्ट्रा क्लास के आदेश तो जारी कर दी है लेकिन कक्षाओं का संचालन कैसे करेंगे, इसकी व्यवस्था नहीं थी। दूसरी तरफ भीषण गर्मी के चलते 4 जिलों में कलेक्टर्स ने स्कूल बंद रखने के आदेश दे दिए हैं। सवाल तो बनता है कि इतनी भीषण गर्मी में बोर्ड परीक्षा का दूसरा दौर कैसे संचालित हो पाएगा।
Madhya Pradesh School Education Faces Heatwave Concern Over Second Phase of Board Exams
माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्य प्रदेश, भोपाल द्वारा आयोजित कक्षा 10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षाओं की दूसरी परीक्षा संकट में दिखाई दे रही है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ऑनलाइन आवेदन की तारीख तो बढ़ा दी गई है लेकिन परीक्षा का आयोजन कैसे हो पाएगा, इसकी व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है। दूसरी परीक्षा का आयोजन 7 मई से शुरू होने वाला है। पूरे मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो चुका है। जबलपुर, दमोह, रतलाम जिलों में नर्सरी से पांचवीं कक्षाओं तक एवं पन्ना जिले में स्कूलों में नर्सरी से 8वीं क्लास तक गर्मी की स्पेशल छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम विभाग द्वारा लगातार अलर्ट जारी किए जा रहे हैं और स्पष्ट कहा जा रहा है कि यदि खुले में निकले तो लू लग सकती है। ऐसी स्थिति में, बोर्ड परीक्षाओं का संचालन कैसे होगा। जबकि परीक्षा कक्ष में लगे हुए पंखे भी ठीक प्रकार से नहीं चलते हैं।
भीषण गर्मी में परीक्षा आयोजित करने के लिए यह व्यवस्थाएं चाहिए
- हर कमरे के बाहर या भीतर ठंडे और साफ पीने के पानी की व्यवस्था हो। 'वॉटर वॉलिंटियर्स' नियुक्त किए जा सकते हैं जो छात्रों की सीट तक पानी पहुँचा सकें ताकि उनका समय खराब न हो।
- सभी कमरों में पंखे चालू स्थिति में हों। यदि संभव हो, तो खस की टट्टियाँ या पोर्टेबल कूलर का उपयोग किया जा सकता है। खिड़कियों पर गहरे रंग के पर्दे या रिफ्लेक्टिव फिल्म लगानी चाहिए ताकि सीधी धूप अंदर न आए।
- परीक्षा के दौरान बिजली कटौती से बचने के लिए जनरेटर या इनवर्टर की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए।
- प्रत्येक केंद्र पर ORS (ओआरएस घोल), ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट्स का पर्याप्त स्टॉक होना चाहिए।
- एक अलग 'रिकवरी रूम' होना चाहिए जहाँ लेटने की व्यवस्था और प्राथमिक उपचार के साधन हों। यदि किसी छात्र को हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें, तो तत्काल उपचार मिल सके।
- स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के साथ समन्वय कर एक नर्स या डॉक्टर की तैनाती केंद्र पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- जहां तक संभव हो, परीक्षाएं भूतल (Ground Floor) पर आयोजित की जानी चाहिए, क्योंकि ऊपरी मंजिलों पर छत तपने के कारण गर्मी अधिक होती है।
- छात्रों को धूप में लाइन में खड़ा न होना पड़े, इसके लिए स्कूल के मुख्य द्वार को समय से पहले खोल देना चाहिए और छायादार प्रतीक्षा स्थल की व्यवस्था करनी चाहिए।
- परीक्षा का समय सुबह जल्दी (जैसे 7:30 या 8:00 बजे) रखा जाना चाहिए ताकि दोपहर की भीषण तपिश से पहले छात्र घर लौट सकें।
- छात्रों को सूती और ढीले कपड़े पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए। पारदर्शी पानी की बोतल साथ लाने की छूट अनिवार्य है।
शिक्षकों और पर्यवेक्षकों (Invigilators) को इन लक्षणों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए:
- अत्यधिक सिरदर्द या चक्कर आना।
- जी मिचलाना या उल्टी महसूस होना।
- पसीने का अचानक रुक जाना और त्वचा का लाल व गर्म होना।
परीक्षा केंद्रों पर 'छाया' सुनिश्चित करने के लिए टेंट या शामियाने का उपयोग प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य भवन तक किया जा सकता है, ताकि छात्र सीधे सूर्य के संपर्क में न आएं।

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