भोपाल, 26 अप्रैल 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गेहूं उपार्जन घोटाला पकड़ा गया है। भोपाल जिले की बैरसिया विधानसभा से विधायक श्री विष्णु खत्री का भागवती वेयर हाउस, गेहूं से भरा हुआ मिला है। जबकि अभी तो गेहूं उत्पादन की प्रक्रिया चल रही है। खरीदी शुरू होने से पहले ही विधायक महोदय के वेयरहाउस में गेहूं पहुंच गया था। इस मामले में कठोर सी दिखाई देने वाली प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
कर्मचारियों को सिर्फ नोटिस, किसान और समिति ब्लैक लिस्टेड
मामले का खुलासा होने के बाद खाद्य विभाग ने खरीदी कराने वाली समिति को ब्लैक लिस्टेड कर दिया। गेहूं बेचने वाले किसानों को भी ब्लैक लिस्टेड किया गया है, जिससे यह किसान अब सरकारी केंद्रों पर गेहूं नहीं बेच पा रहे हैं। घटना के बाद जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन ने जेएसओ पुष्पराज पाटिल और मयंक द्विवेदी को निगरानी की जिम्मेदारी दी थी, लेकिन दोनों ने पहले से हो रही गेहूं खरीदी को लेकर अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी। जिसको लेकर खाद्य विभाग के आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
विधायक से तो सवाल भी नहीं किया
जैसा कि आप उम्मीद कर सकते हैं, इस पूरे घोटाले में आरोपी कर्मचारियों को नोटिस दिया गया, खरीदने वाली समिति और बेचने वाले किसानों को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया लेकिन विधायक महोदय से किसी ने सवाल तक नहीं किया। बात सिर्फ इतनी सी नहीं है, विधायक महोदय के वेयरहाउस को दोबारा से मैपिंग करके खरीदी केदो में शामिल किया जा रहा है। मतलब बेचने वाला जिम्मेदार, खरीदने वाला जिम्मेदार, निगरानी वाले जिम्मेदार, लेकिन वेयर हाउस का मालिक जिम्मेदार नहीं है क्योंकि वह विधायक है।
कांग्रेस का काम किसानों को करना पड़ रहा है
मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का काम है कि वह किसानों के साथ हो रहे अत्याचार का पता लगे। किसानों के बीच जाए और उनमें विश्वास पैदा करें, लेकिन कांग्रेस पार्टी ऐसा कुछ भी नहीं कर पा रही है। जागरूक किसानों ने मीडिया के माध्यम सेमामला उठाया और प्रशासन तक पहुंचा। शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू भी हो गई है। सवाल यह है कि जब कांग्रेस, किसानों का विश्वास नहीं जीत रही है तो फिर भाजपा सरकार से नाराज किसान, कांग्रेस को वोट क्यों देगा। कांग्रेस की इस लापरवाही के कारण ही विष्णु खत्री जैसे विधायक खुलेआम भ्रष्टाचार करने लगे हैं।
अपन गारंटी से कह सकते हैं कि ऐसा केवल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नहीं हुआ है बल्कि मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी हुआ होगा, परंतु क्या करें, हर जगह जागरूक किसान और सक्रिय पत्रकार एक साथ समूह बनाकर सरकार तक नहीं पहुंच पाते हैं।

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