भोपाल समाचार, 18 मार्च 2026: अब इस विषय को इग्नोर नहीं किया जा सकता। पीपल्स यूनिवर्सिटी को दो बार धमकी देने के बाद आज जेके हॉस्पिटल और यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। अब इस विषय को गंभीरता से लेना होगा क्योंकि यह धमकियां किसी टेरर अटैक से पहले का ट्रायल भी हो सकती है। भोपाल पुलिस ने पिछले कुछ दिनों में मछली और चमड़ा के खिलाफ कार्रवाई करके शाहिद अपराधियों की किसी ऐसे समूह को छेड़ दिया है, जो भारत के बाहर बैठकर एक लंबी प्लानिंग के साथ, एक निश्चित टारगेट के लिए, बड़ा इन्वेस्टमेंट करके काम कर रहा था।
Bomb Threat in Bhopal Again, Security Agencies Probe Terror or Hoax Angle
ताजा खबर मिली है कि भोपाल के कोलार स्थित जेके हॉस्पिटल और यूनिवर्सिटी को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। दोनों कैंपस में 21 बम रखने का दावा किया गया है। यहां भी एक ईमेल के माध्यम से धमकी दी गई है। मेल में लिखा- 1:30 पर ब्लास्ट होगा। इस धमकी के कारण कैंपस खाली करवा दिए गए हैं। पुलिस तैनात हो गई है। ऐसा ही कुछ पीपल्स यूनिवर्सिटी में भी हुआ था। दो बार धमकी मिली, दोनों बार कोई धमाका नहीं हुआ। कोई बम नहीं मिला। दोनों बार कैंपस खाली करवाना पड़ा। दोनों बार पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन शुरू की लेकिन पुलिस की इन्वेस्टीगेशन किसी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई।
या तो कोई आतंकवादी है या सिरफिरा
इन धमकियों में एक बड़ा पैटर्न मिलता है। धमकियां ईमेल के माध्यम से दी जा रही है। ब्लास्टिंग की टाइमिंग भी बताई जा रही है। धमकियां केवल मेडिकल यूनिवर्सिटी को मिल रही हैं। यह सब कुछ सामान्य तौर पर पैनिक सिचुएशन क्रिएट करने के लिए किया जाता है। इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि दोनों मेडिकल यूनिवर्सिटी ने किसी के साथ कोई अन्याय किया है और बदला लेने के लिए वह ऐसी धमकी भेज कर यूनिवर्सिटी प्रशासन को डिस्टर्ब कर रहा है। लेकिन ऐसी किसी संभावना पर विश्वास करके विषय की गंभीरता को कम भी नहीं किया जा सकता है।
यह भी हो सकता है कि कोई आतंकवादी संगठन भोपाल पुलिस का परीक्षण कर रहा है। वह समझने की कोशिश कर रहा है की धमकी मिलने की कितनी देर में पुलिस रिस्पांस करती है। भोपाल पुलिस का इस तरह के मामलों में रिस्पांस का तरीका क्या होता है और वह कितना क्विक रेस्क्यू ऑपरेशन कर सकते हैं। भोपाल आतंकवादियों के निशाने पर इसलिए हो सकता है क्योंकि पिछले कुछ समय में पुलिस ने ऐसे आतंकवादी समूहों को टारगेट किया है जो बड़े इन्वेस्टमेंट के साथ अपनी साजिश पर काम कर रहे हैं। भोपाल पुलिस ने गलती यह की, कि उनके कनेक्शन पूरी तरह से खत्म नहीं किए। शायद उनके पॉलिटिकल कनेक्शन ने भी पुलिस को डंडा चलाने से रोक दिया था।

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