IPC 273 - हानिकारक खाद्य एवं पेय पदार्थ का विक्रय करना, कितना गंभीर अपराध कितनी सजा, पढ़िए

Legal general knowledge and law study notes

केंद्र सरकार ने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954 पारित किया जो भारत मे दिनांक 01 जून 1955 से प्रभावी हुआ। इस व्यापक कानून द्वारा स्वास्थ्य के हानिकारक खाद्य एवं पेय पदार्थ के क्रय विक्रय पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई। अगर कोई व्यक्ति शाम को तैयार किए गए समोसे, दूसरे दिन सुबह सब कुछ जानते हुए खराब तेल में पका कर बेचता है तो उसके खिलाफ PFA act, 1954 (खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954) के साथ भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत भी मामला दर्ज होगा जानिए।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 273 की परिभाषा

जो कोई व्यक्ति किसी खाद्य या पेय पदार्थों में अपमिश्रण करके बेचेगा जिसके सेवन से किसी भी मनुष्य के स्वास्थ्य में बुरा प्रभाव पड़ने वाला हो तब खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ में अपमिश्रण करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 273 के अंतर्गत मामला दर्ज होगा
विशेष नोट:- राज्य संशोधन अधिनियम, 1975 क्रमशः 1973 के अनुसार अब उत्तर प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल में यह अपराध संज्ञेय एवं अधिकतम आजीवन कारावास और जुर्माने से दण्डनीय होगा।

Indian Penal Code, 1860 section 273 Punishment 

इस धारा के अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते हैं इनकी सुनवाई किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है। सजा:- इस धारा के अपराध के लिए अधिकतम छ: माह की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 

इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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