Legal advice- धारा 415 IPC में राजीनामा करने से कोर्ट केस क्लोज हो जाएगा या नहीं, पढ़िए CrPC 320-1

Bhopal Samachar
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भारतीय दण्ड संहिता की धारा 415 के अनुसार व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ बेईमानी से या कपटपूर्ण तरीके से धोखा देकर चल या अचल संपत्ति प्राप्त करता है वह छल का अपराध होगा। इस धारा के अंतर्गत सामान्य छल को अपराध माना है। जैसे कि कोई व्यक्ति किसी को मानसिक क्षतिग्रस्त कर धोखा देता है या धोखा देकर संपत्ति को प्राप्त कर लेता है या दस्तावेज को फर्जी बनाकर कोई लाभ लेता है आदि।

आईपीसी की धारा 417- दंड व्यवस्था

साधारण छल के अपराध के लिए दण्ड की व्यवस्था भारतीय दण्ड संहिता की धारा 417 मे की गई है।
यह अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते हैं इनकी सुनवाई किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है। सजा- इस अपराध के लिए एक वर्ष की कारावास या जुर्माने या दोनो से दण्डित किया जा सकता है।

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 417 का अपराध एक शमनीय अपराध है जानिए

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा (1) के अनुसार साधारण छल का अपराध एक समझौता योग्य अपराध हैं इसका समझौता बिना न्यायालय की आज्ञा के या न्यायालय के बाहर उस व्यक्ति से किया जा सकता है जिसके साथ छल किया गया हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665

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