संज्ञेय अपराध के अन्वेषण में SDOP का क्या काम होता है जानिए - CrPC SECTION-158

पिछले लेखों मे हमने आपको यह बता दिया है कि किसी भी संज्ञेय अपराध की प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना प्रभारी द्वारा दर्ज की जाती है एवं वह इस अपराध का इन्वेस्टिगेशन करता है। इसके साथ ही अपराध की जानकारी तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारी अर्थात SDOP को देगा और SDOP ही अपने माध्यम से ऐसी रिपोर्ट या सूचना मजिस्ट्रेट को देगा अर्थात पुलिस थाने का थाना प्रभारी सिर्फ अन्वेषण ही करेगा। 

कौन होता है SDOP जानिए:- 

SDOP या SDPO दोनो पद एक ही होते हैं। अंग्रेजी में दोनों का अर्थ Sub Divisional Police Officer होता है। SDOP अपने क्षेत्र के पुलिस पुलिस थाने का सबसे बड़ा वरिष्ठ अधिकारी होता है, अगर पुलिस थाने के छोटे अधिकारी के खिलाफ शिकायत की जानी है तब व्यक्ति स्वयं SDOP से कर सकता है। इसके अलावा अन्वेषण की रिपोर्ट देखना एवं क्षेत्र की कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होती हैं। शहरीय क्षेत्रो अर्थात बड़े बड़े महानगरों में इन्हें CSP भी कहा जाता है।

दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 158 की परिभाषा:-

1. अगर कोई पुलिस अधिकारी के पास कोई संज्ञेय अपराध में एफआईआर एवं असंज्ञेय अपराध एनआरसी लिखी जाती है तब वह इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारी SDOP को देगा। एवं ऐसे वरिष्ठ अधिकारी(SDOP) के माध्यम से रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को भेजी जाएगी।

2. थाना प्रभारी द्वारा दी गई अपराध की रिपोर्ट को देखने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी टीआई को संज्ञेय अपराध में तुरंत अन्वेषण को भेज देगा अगर इसे अपराध गंभीर लगता है तब एवं संज्ञेय अपराध की रिपोर्ट की एक कॉपी तुरंत बिना बिलम्ब करे मजिस्ट्रेट को भेजेगा।

उपर्युक्त नियमों से स्पष्ट होता है कि थाना प्रभारी को संज्ञेय अपराध की हर रिपोर्ट को SDOP को भेजना आवश्यक होता है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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