जीवन साथी लापता हो जाए तो क्या दूसरी शादी कर सकते हैं, पढ़िए The Hindu Marriage Act,1955

साक्ष्य अधिनियम 1872 की धारा 108 कहती है कि अगर किसी व्यक्ति का 7 वर्षों तक अता-पता ही नहीं होता है तो यह अनुमान लगा लिया जाना कि वह मर चुका है, वैध होगा। यानी कानूनी तौर पर ऐसे व्यक्ति को मृत मान लिया जाता है। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के अनुसार विधवा महिला अथवा विदुर व्यक्ति को दूसरी शादी करने का अधिकार है, परंतु प्रश्न यह है कि क्या उपरोक्त स्थिति में जीवनसाथी दूसरी शादी कर सकता है। यदि 7 साल बाद दूसरी शादी कर ली जाए और उसके बाद लापता जीवनसाथी वापस लौट आए तब क्या होगा। दूसरा विवाह वैध रहेगा या फिर अवैध माना जाएगा। पढ़िए:-

हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 (1) (vii) की परिभाषा:-

अगर पति या पत्नी में से कोई भी एक पक्षकार सात वर्षों तक अज्ञात रहता है तो दूसरा पक्षकार उस विवाह को विच्छेद कराने के लिए न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर सकता है। न्यायालय ऐसे पक्षकार को तलाक की डिक्री पारित कर देगा। अगर तलाक की डिक्री प्राप्त होने के बाद पत्नी दूसरी शादी कर ले और खोया हुआ पति वापस आ जाता है तब उससे दूसरे पक्षकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा एवं ऐसे विवाह से उत्पन्न संतान औरस (वैध) मानी जायेगी। 

लेकिन अगर पति सात वर्षों से अज्ञात है और पत्नी बिना तलाक की डिक्री प्राप्त किए कोई दूसरी शादी कर लेती है और पति वापस आ जाता है तब यह शादी अवैध हो सकती है लेकिन पति को इस शादी से कोई एतराज नहीं होगा तब यह विवाह वैध हो सकता है। क्योंकि साक्ष्य अधिनियम की धारा 108 बताती है कि सात वर्षों तक व्यक्ति को अज्ञात रहने पर सिर्फ मृत्यु का अनुमान लगाया जा सकता है न कि उसे मृत घोषित किया जाएगा। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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