यह कलेक्टर साहब दतिया का चुनाव करवा पाएंगे? - लावारिस शहर, उपदेश अवस्थी

Updesh Awasthee
भोपाल, 11 जुलाई 2026:
दतिया में 10 जुलाई की शाम 6:00 बजे से जो कुछ भी हो रहा है, वह चिंता का विषय है लेकिन जिस व्यक्ति के हाथ में दतिया की कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी है, मतलब दतिया कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखेडे का लेटेस्ट बयान सुनने के बाद, मन में सवाल उठता है कि क्या यह कलेक्टर साहब दतिया का चुनाव करवा पाएंगे? 

11 जुलाई की सुबह दतिया कलेक्टर का बयान - VIDEO 


ऐसे कलेक्टर चुनाव कैसे करवा पाएगा?

इसमें कोई दो राय नहीं कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के युवा अधिकारी श्री स्वप्निल वानखेडे काफी विनम्र और शांतिप्रिय प्रतीत हो रहे हैं परंतु उनकी यही विनम्रता दतिया में हानिकारक साबित हुई है। लगभग 11 घंटे तक नेशनल हाईवे नंबर 44 पूरी तरह से ब्लॉक रहा। दोनों तरफ 15-15 किलोमीटर लंबा चक्का जाम था। बाकी सब भी चिंता की बात है लेकिन गंभीर चिंता की बात यह है कि इस ट्रैफिक जाम में झांसी मेडिकल, छतरपुर और टीकमगढ़ से मरीज को लेकर इलाज के लिए ग्वालियर जा रही कई एंबुलेंस भी फंसी हुई थी। 

दतिया में आचार संहिता लागू है लेकिन सीमाएं सील नहीं की गई। बड़ी संख्या में लोग दतिया के बाहर से दतिया के अंदर प्रवेश हुए। डबरा, भितरवार और झांसी के वाहनों की बड़ी संख्या देखी गई, लेकिन किसी को दतिया बॉर्डर पर रोक नहीं गया। क्योंकि बॉर्डर सील नहीं किए गए। 

उनके जो मन में आया किया लेकिन हमने डंडा नहीं उठाया: कलेक्टर

दतिया कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखेड़े स्वयं अपने बयान में बता रहे हैं कि, चक्का जाम कर रहे उपद्रवियों को उन्होंने रात भर में कई बार समझाने का प्रयास किया लेकिन वह हाईवे खाली करने को तैयार नहीं थे। कलेक्टर स्वयं बता रहे हैं कि सुबह 4:00 बजे उन लोगों ने पुलिस पर पतराव किया जिसमें सपा और एडिशनल एसपी सहित पुलिस फोर्स के 6 लोग घायल हुए। कलेक्टर अपने बयान में यह भी बता रहे हैं कि उन्होंने ट्रैफिक जाम में फंसी हुई गाड़ियों में तोड़फोड़ की, और फिर बड़ी प्रसन्नता के साथ कह रहे हैं कि, इतना सब होने के बाद भी हमने लाठी चार्ज नहीं किया। 

Datia Collector Swapnil Wankhede IAS Faces Questions Over Eligibility, Row Intensifies

सवाल तो बनता है कि दतिया कलेक्टर क्या चाहते हैं, उनकी तरफ से फायरिंग हो जाने के बाद लाठी चार्ज करते। पूरे 11 घंटे तक हाइवे जाम रहा। एंबुलेंस में मरीज फंसे रहे, और कलेक्टर उपद्रवियों के सामने निवेदन करते रहे। कलेक्टर श्री स्वप्निल वानखेडे मीडिया के सामने बयान में कह रहे हैं कि हमने लाठी चार्ज नहीं किया, सब ने वीडियो रिकॉर्ड किया था लेकिन किसी भी वीडियो में हम लाठी उठाते हुए नहीं देखेंगे। 

मतलब समझ में नहीं आ रहा है, यह बयान कलेक्टर का है या पड़ोसी का। मसूरी में जब इस तरह की सिचुएशन हैंडल करने की ट्रेनिंग दी जा रही थी, तब स्वप्निल वानखेड़े क्या पिज़्ज़ा खाने चले गए थे? उन्होंने ट्रैफिक जाम किया था। विरोध प्रदर्शन करने के लिए 1-2 घंटे काफी था। 11 घंटे तक इंतजार करने की क्या जरूरत थी। हमने कुछ नहीं किया हमारी कोई गलती नहीं है, ऐसे अपनी नौकरी की चिंता करने वाले अधिकारियों से क्या उम्मीद की जा सकती है? क्या दतिया जैसी विधानसभा में ऐसे अधिकारी चुनाव हैंडल कर पाएंगे?

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