नरोत्तम मिश्रा पर दिग्विजय सिंह की नजर, कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगे?

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 11 जुलाई 2026
: नरोत्तम मिश्रा पहले से ही हॉट केक थे, हमेशा हेडलाइंस दिया करते थे लेकिन 10 जुलाई की शाम 6:00 बजे से लगातार ब्रेकिंग न्यूज़ दे रहे हैं। दतिया में 3000 से ज्यादा लोग प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन नरोत्तम मिश्रा उनके साथ नहीं है, तो फिर पंडित जी कहां है?। इस बीच दूसरी बड़ी खबर आपको देता हूं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के चाणक्य और द्रोणाचार्य श्री दिग्विजय सिंह की नजर नरोत्तम मिश्रा पर पड़ गई है। सवाल तो बनता है कि क्या नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे? चलिए नापतोल करते हैं:- 

पृष्ठभूमि - Will Narottam Mishra Join Congress? 

सामान्य तौर पर इस तरह की घटनाक्रम में विपक्षी पार्टी के नेता, विरोधी पार्टी को कमजोर और अपनी पार्टी को मजबूत बताने की कोशिश करते हैं। मतलब दतिया में नरोत्तम मिश्रा की घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं को यह बताना चाहिए कि, देखिए बीजेपी की स्थिति कितनी खराब है जबकि कांग्रेस पार्टी एकजुट है, लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं हो रहा है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के भाग्य विधाता श्री दिग्विजय सिंह सामान्य तौर पर सुबह 5:00 बजे से X पर पोस्टिंग करने लगते हैं लेकिन दतिया के घटनाक्रम को लेकर वह सुबह 10:30 बजे तक चुप रहे फिर उन्होंने बड़ी चतुराई के साथ X पर नरोत्तम मिश्रा का एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए लिखा 
"जय हो पंडित जी। लगे रहो। आपके साहस आपकी दिलेरी को सलाम। जय सिया राम।" 

दिग्विजय सिंह ने पंडित जी की तरफ हाथ बढ़ाया

बुंदेलखंड की राजनीति में इस तरह के बयान को "चारा डालना" कहते हैं। मतलब श्री दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से नरोत्तम मिश्रा की तरफ हाथ बढ़ा दिया है। अब सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस पार्टी और नरोत्तम मिश्रा के गुण मिल पाएंगे। क्या नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे? इस सवाल के हां और ना में कई तर्क दिए जा सकते हैं:- 

कांग्रेस को ज़िताऊ कैंडिडेट चाहिए

दतिया में श्री राजेंद्र भारती ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। पिछली बार भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए श्री अवधेश नायक को कांग्रेस पार्टी की ओर से टिकट दिया गया था परंतु कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा उनका भारी विरोध किया गया और पार्टी को टिकट बदलना पड़ा। मतलब इस बार भी टिकट की गुंजाइश बहुत कम है। दूसरा नाम घनश्याम सिंह का है। इसमें कोई दो राय नहीं कि वह दूसरे नंबर के दमदार नेता हैं लेकिन त्रिकोणीय मुकाबले में जीत की गारंटी नहीं है। यानी कांग्रेस को एक जितवा कैंडिडेट की जरूरत है। 

जिनको कांग्रेस से लाए थे उनके साथ कांग्रेस में चले जाएंगे

पिछले 18 घंटे में डॉ नरोत्तम मिश्रा ने क्षेत्र में अपनी पावर का प्रदर्शन कर दिया है। वह भाजपा की नेता जरूर है लेकिन जिस प्रकार का विरोध प्रदर्शन उनके समर्थन कर रहे हैं, यह पूरी तरह से कांग्रेस की पॉलिटिक्स को सूट करता है। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को ऐसे ही नेताओं की जरूरत है, जिनके पास अपने समर्थकों की संख्या हो। वैसे भी पिछले ढाई साल में दतिया में आधी से ज्यादा कांग्रेस, नरोत्तम मिश्रा के पीछे जाकर खड़ी हो चुकी है। मतलब जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर मूल रूप से कांग्रेसी ही है। अब तक पंडित जी कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को कांग्रेस से भाजपा में ला रहे थे, अब उन्हें कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में चले जाएंगे। सब कुछ घर जैसा ही है।

कांग्रेस को मध्य प्रदेश में नरोत्तम मिश्रा की जरूरत है

डॉ नरोत्तम मिश्रा केवल दतिया के नेता नहीं है, बल्कि मीडिया हेडलाइंस देने वाले नेता हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस को ऐसे नेता की जरूरत है जो जीतू पटवारी की तरह मीडिया के सवालों से भागे नहीं बल्कि, करारा जवाब दे। रही बात हिंदुत्व की तो आजकल तो कांग्रेस पार्टी भी हिंदूवादी हो गई है और दिग्विजय सिंह तो अभी-अभी राम भक्त हुए हैं। 

नरोत्तम मिश्रा से महाराज भी...

ग्वालियर चंबल में डॉ नरोत्तम मिश्रा, भाजपा के सबसे पावरफुल नेता श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की जबरदस्त काट हो सकते हैं। सिंधिया जब कांग्रेस में थे, मिश्रा जी ने तब भी सिंधिया जी को चक्करघिन्नी कर दिया था। ग्वालियर चंबल में उनकी अच्छी पकड़ भी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की झांसी वाले बेल्ट में पंडित जी कांग्रेस के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। 

दिग्विजय सिंह और नरोत्तम मिश्रा का स्ट्रांग कनेक्शन

सबसे खास बात, डॉ नरोत्तम मिश्रा और डॉ गोविंद सिंह (चंबल वाले) के बीच में पक्की दोस्ती है। और डॉ गोविंद सिंह एवं दिग्विजय सिंह दोनों एक यूनिट हैं। पिछले 12 घंटे में दतिया में जो कुछ भी हुआ है, इसके बाद वैसे भी भाजपा में डॉ नरोत्तम मिश्रा के लिए कुछ नहीं बचा। यदि पंडित जी किसी तरीके से भाजपा का टिकट हासिल करने में कामयाब हो भी जाते हैं (जिसकी संभावना बिल्कुल नहीं है) तब भी अगले ढाई साल में मिश्रा जी को दतिया से उखाड़ दिया जाएगा। क्योंकि भाजपा में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होती, जो पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपना व्यक्तिगत समर्थक बना ले और पार्टी के खिलाफ बगावत के लिए तैयार करे। 

एक और बड़ी बात है जो इस फॉर्मूले को फिक्स करती है। वही जो मैंने लिखी नहीं लेकिन आप समझ गए।

अब तक जो कुछ भी हुआ है वह अप्रत्याशित ही है इसलिए पुराने घटनाक्रमों के आधार पर नए अनुमान लगाना गलत होगा। अब तो केवल परिस्थितियों के आधार पर ही पॉलिटिकल गॉसिप किया जा सकता है। क्या होगा यह तो किसी को नहीं पता लेकिन यह बात पक्की है कि चाणक्य की नजर चंद्रगुप्त पर पड़ गई है। जय सियाराम- उपदेश अवस्थी

लेटेस्ट सिग्नल नंबर वन: लेटेस्ट वीडियो सामने आया है। उसमें डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा डबरा रेलवे स्टेशन पर बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। उनकी फैमिली उनके साथ है। आज उनके माथे पर हिंदुत्व का प्रतीक लाल तिलक नहीं है।

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