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भारत में चुनाव की जरूरत ही क्या है - GK IN HINDI

भारत में लोकतंत्र की स्थापना के 74 साल बाद कुछ लोग यह सवाल करने लगे हैं कि जब हर सरकार एक जैसी ही होती है तो फिर भारत में चुनाव की जरूरत ही क्या है। संभव है, यह सवाल उनकी निराशा से उपजा हो परंतु यह भी संभव है कि चुनाव पर होने वाले सरकारी खर्चों की जानकारी मिलने के बाद उन्हें यह प्रक्रिया फिजूलखर्ची लगती हो। जो भी हो, परंतु यह बताना जरूरी है कि भारत में चुनाव की जरूरत क्या है। 

संक्षिप्त में समझिए लोकतंत्र क्या है

लोकतंत्र (लोकतन्त्र) (संस्कृत: प्रजातन्त्रम् ) (शाब्दिक अर्थ "लोगों का शासन", संस्कृत में लोक, "जनता" तथा तंत्र, "शासन",) या प्रजातंत्र एक ऐसी शासन व्यवस्था जो जनता द्वारा अपने लिए निर्धारित की गई है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि लोकतंत्र का मूल आधार है जनता का शासन, जनता की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं। 

हमें चुनाव की आवश्यकता क्यों होती है

क्योंकि हर छोटे-बड़े डिसीजन के लिए 125 करोड़ लोगों से पूछा नहीं जा सकता इसलिए चुनाव के माध्यम से उनका प्रतिनिधि निर्धारित करता है कि शासन की व्यवस्था कैसी होनी चाहिए। उस में क्या बदलाव होने चाहिए। जनता का प्रतिनिधि कौन होगा इस बात का फैसला निर्वाचन यानी मतदान के माध्यम से होता है। इससे बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं है। 

चुनाव नहीं कराएंगे तो क्या होगा 

यदि हम चुनाव नहीं कराएंगे तो दो बातें होंगी। 
पहली: देश की कमान ब्यूरोक्रेट्स यानी अफसरों के हाथ में आ जाएगी। निश्चित रूप से वह ज्यादा पढ़े लिखे और समझदार होते हैं लेकिन अक्सर आम जनता की दर्द को समझने में असक्षम साबित होते हैं। उनका पहला फोकस खजाना भरना और सिस्टम को सुरक्षित करना होता है। उनके साथ यदि सिस्टम में जनता का चुनाव हुआ प्रतिनिधि नहीं हुआ तो वह मनमानी कर सकते हैं। 
दूसरी: तानाशाही शुरू हो जाएगी। कोई विदेशी या फिर देसी शक्तिशाली बस्ती सिस्टम को अपने कब्जे में ले लेगा और फिर मुझे ऐसा चाहेगा वैसे कानून बनाएगा। जनता विरोध नहीं कर पाएगी क्योंकि लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।

सरल शब्दों में समझिए, चुनाव से फायदा क्या है

चुनाव के माध्यम से आप अपना नेता नहीं चुनते, अपना प्रतिनिधि यानी संदेशवाहक चुनते हैं। आपका अधिकार है कि आप उसे अपनी जरूरतों, समस्याओं और विचारों से अवगत कराएं। उसकी जिम्मेदारी है कि वह आपकी जरूरतों, समस्याओं और विचारों को नोट करें एवं अपने सदन में जाकर सवाल करें। दरअसल, गड़बड़ी सिर्फ दो स्तर पर होती है। पहली आपका प्रतिनिधि अपने आपको आपका नेता बताने लगता है, और आप मान भी जाते हैं। दूसरी, चुनाव जीतने के बाद वह जनता से छुपने की कोशिश करता है और जनता उसे ऐसा करने देती है। याद रखिए, अपने प्रतिनिधि पर लगाम रखने की जिम्मेदारी भी आपकी होती है, नहीं तो वह बेलगाम हो सकता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article 

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