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मॉब लिंचिंग कर रही भीड़ को रोक रहे लोक सेवक को धमकाना या पीटना, किस धारा के तहत मामला दर्ज होगा - पढ़िए IPC SECTION 152

यदि किसी जगह पर विधि विरुद्ध जमाव (भीड़ अथवा जन समूह) लगा हुआ है और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के निर्देश पर SDM अथवा नियंत्रण के लिए नियुक्त किया गया मजिस्ट्रेट अपने सहयोगी कर्मचारियों एवं पुलिस बल के साथ विधि विरुद्ध जमाव को हटाने के लिए जाता है और वहां मौजूद भीड़ अथवा जन समूह पुलिस एवं प्रशासन पर हमला कर देते हैं, पथराव कर देते हैं, तब ऐसी स्थिति में मारपीट अथवा बलवा की सामान्य धाराओं के अलावा प्रथम सूचना प्रतिवेदन में एक विशेष धारा को भी दर्ज किया जाएगा। आईपीसी में धारा 152 इसी प्रकार के अपराध के लिए है। सनद रहे कि यदि विधि विरुद्ध जमाव धारा 141 के अंतर्गत आता है तो फिर इसी प्रकार के अपराध के लिए अपराधियों को आईपीसी की धारा 145 के तहत दंडित किया जाएगा।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 152 की परिभाषा:-

अगर कोई पुलिस बल या SDM किसी ऐसे बल्वा या विधि विरुद्ध जमाव को हटाने जाते हैं, तब बल्वे या जमाव के सदस्य न हटने के लिए पुलिस बल या SDM को धमकी दे या उन पर हमला, पथराव करे तब ऐसा करने वाले सभी आरोपी अन्य धाराओं के साथ-साथ धारा 152 के अंतर्गत दोषी होंगे।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 152 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध किसी भी प्रकार से समझौता योग्य नहीं है, यह संज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होते हैं। इनकी सुनवाई का अधिकार प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को होता है। सजा- इस अपराध के लिए तीन वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनो से दाण्डित किया जा सकता है। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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