भोपाल समाचार, 19 जून 2026: मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रतिष्ठित पत्रकार श्री सतीश सिंह से बातचीत के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने बताया है कि विस्तार के बाद उनके मंत्रिमंडल में किस प्रकार के मंत्री दिखाई देंगे। कितने युवा होंगे और कितने वरिष्ठ एवं अनुभवी विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा। चलिए कैलकुलेट करते हैं, डॉ मोहन के फार्मूले में भाजपा के कितने विधायक फिट बैठते हैं:-
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पद हेतु योग्यता निर्धारित
बातचीत के दौरान सीएम मध्य प्रदेश डॉ मोहन यादव ने यह स्पष्ट कर दिया की फाइनल डिसीजन दिल्ली से होगा लेकिन यह भी बता दिया कि उन्होंने मंत्री पद हेतु चयन के लिए सभी प्रकार की योग्यताओं का निर्धारण कर लिया है। डॉ मोहन ने कहा कि, विस्तार के बाद मध्य प्रदेश का मंत्रिमंडल बिल्कुल वैसा ही दिखाई देगा जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंत्रिमंडल दिखाई देता है। मतलब युवा और वरिष्ठ मंत्रियों के बीच का जैसा अनुपात केंद्रीय मंत्रिमंडल में है, बिल्कुल वैसा ही अनुपात मध्य प्रदेश के मंत्रिमंडल में दिखाई देगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में युवा और वरिष्ठ मंत्रियों का अनुपात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल में टोटल 72 मंत्री हैं। इनमें 50 वर्ष से कम आयु के केवल 5% मंत्री हैं। 50 से अधिक और 60 वर्ष से कम आयु के लगभग 35% मंत्री हैं और 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 65% मंत्री हैं। यदि 60 वर्ष से कम आयु वाले नेताओं को युवा कहा जाए तो यह अनुपात लगभग 1:2 हो जाता है। मतलब एक युवा के साथ दो वरिष्ठ मंत्री हैं।
मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में युवा और वरिष्ठ मंत्रियों का अनुपात
मध्य प्रदेश सरकार में कुल 31 मंत्री हैं। इसमें 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 15 मंत्री हैं और मुख्यमंत्री सहित 16 मंत्री युवा हैं। इसका मतलब हुआ कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की तुलना में मध्य प्रदेश का मंत्रिमंडल पहले से ही युवा है। अब डॉक्टर मोहन ने फार्मूला दिया है कि युवा विधायकों को शामिल किया जाएगा लेकिन वरिष्ठ विधायकों को भी सम्मान दिया जाएगा। इसका मतलब है कि मंत्रिमंडल विस्तार में युवा क्रिएटिव बनाम वरिष्ठ अनुभवी का अनुपात 2:1 होगा।
मध्य प्रदेश सरकार में कितने मंत्रियों की वैकेंसी
मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या 230 है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के अनुसार राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या 15% से अधिक नहीं हो सकती। इसका मतलब हुआ कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के अलावा 34 मंत्री बनाए जा सकते हैं। मोहन मंत्रिमंडल में 31 मंत्री हैं। केवल तीन मंत्रियों के लिए वैकेंसी ओपन है, लेकिन बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के समय कुछ मंत्रियों को अपने विधानसभा क्षेत्र में काम करने की हर समय दिया जाएगा। उनसे मंत्री पद का दायित्व वापस ले लिया जाएगा ताकि वह अपने क्षेत्र में ठीक प्रकार से जनता की चिंता कर सकें। इस प्रकार मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्रियों की वैकेंसी 10 के आसपास हो सकती है।
मध्य प्रदेश के दागी मंत्रियों की लिस्ट
विजय शाह: भारतीय सेना के बारे में आपत्तिजनक बयान के कारण मंत्री विजय शाह केवल भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया की मीडिया हाइलाइट्स में आ गए थे और इस बयान के कारण भाजपा को मध्य प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी नुकसान हुआ है। फिर विजय शाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी चल रही है। इसलिए विजय शाह को मंत्री पद की जिम्मेदारी से मुक्त किया जा सकता है ताकि वह कानूनी मामला निपटा कर अगली सरकार में मंत्री पद की तैयारी कर सकें।
कैलाश विजयवर्गीय: भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय स्तर तक काम कर चुके वरिष्ठ नेता श्री कैलाश विजयवर्गीय, अपनी विधानसभा में दूषित पानी कांड के कारण भयंकर विरोध का सामना कर चुके हैं। इंदौर कांड के कारण पूरे देश में भाजपा को नुकसान हुआ और विरोधियों को भाजपा पर हमला करने का मौका मिला। पार्टी की प्रतिष्ठा को बड़ा नुकसान पहुंचा है। वैसे भी श्री कैलाश विजयवर्गीय, अपने जूनियर डॉक्टर मोहन यादव के मंत्रिमंडल में रहना नहीं चाहते। इसलिए संभावना है कि उन्हें मंत्री पद से मुक्त करके किसी दूसरे काम में लगाया जा सकता है।
करण सिंह वर्मा: लाड़ली बहना योजना की हितग्राही महिलाओं के प्रति जो बयान दिया था, उसके कारण पार्टी को काफी नुकसान हुआ। वैसे श्री वर्मा के कारण पार्टी को कोई फायदा नहीं हो रहा है। मतलब श्री वर्मा के रिटायरमेंट का समय आ गया है।
संपतिया उइके: 1000 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप है। मामले में क्लीन चिट दी गई है लेकिन कोई भी निर्दोष साबित नहीं हुआ है, क्योंकि अब तक कोई जांच ही नहीं हुई है।
नागर सिंह चौहान: बहुत सारे विवादों में नाम जुड़ा हुआ है और फिर कई गंभीर आरोप भी हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि, कभी भी पार्टी के खिलाफ बगावत की बात करने लगते हैं। यह बिल्कुल सही समय है जब पार्टी के उपद्रवी नेताओं को सुधार शिविर में भेजा जा सकता है।
नरेंद्र शिवाजी पटेल: रायसेन जिले की उदयपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं लेकिन राजधानी भोपाल में रहते हैं। दोनों जगह की पॉलिटिक्स में हस्तक्षेप करते हैं। पहली बार विधायक बने और इसी के साथ मंत्री पद भी मिल गया। मतलब करेला और नीम चढ़ा हो गया। पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा डाला था। रायसेन में तो भाजपा के सांसद को सम्मान देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करवा डाली थी। अब पर्याप्त समय है जब श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल को राजनीति में शुचिता के अध्ययन और धैर्य के अभ्यास के लिए अवकाश पर भेजा जा सकता है।
प्रहलाद पटेल: सोशल मीडिया प्रोफाइल के हिसाब से तो बड़ी अच्छी नेता हैं लेकिन लोधी समाज को पार्टी के पक्ष में बनाए रखने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। पिछले 6 महीना में लोधी समाज के नेताओं द्वारा कई ऐसे काम किए गए हैं, जो भाजपा को नुकसान पहुंचाते हैं और भाजपा के ही दूसरे नेताओं के सामने चुनौती प्रस्तुत करते हैं। यदि श्री प्रसाद पटेल को वापस राष्ट्रीय राजनीति में भेज दिया जाता है तो मध्य प्रदेश में लोधी समाज को भाजपा के अनुशासन में बनाए रखना संभव हो जाएगा।
मध्य प्रदेश के इन विधायकों में पॉजिटिव पोटेंशियल
रमेश मेंदोला: इंदौर के ऐसे विधायक हैं जो बाकी सबकी तुलना में, अपनी विधानसभा में सबसे लोकप्रिय हैं। इंदौर की किसी भी विधानसभा में कोई भी विधायक इतना लोकप्रिय नहीं है। श्री रमेश मेंदोला अपने क्षेत्र में बेहतरीन सड़क, पानी और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जाने जाते हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत इनकी सुलभ उपलब्धता है जो इनको हमेशा जनता से जुड़े रखती है। श्री रमेश मेंदोला, श्री कैलाश विजयवर्गीय का सबसे बेस्ट रिप्लेसमेंट हो सकते हैं।
दिलीप सिंह परिहार (नीमच): पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ता हैं और किसी भी प्रकार का विवाद इनके साथ नहीं जुड़ा हुआ है। इनके कारण पार्टी को कोई नुकसान नहीं हुआ है। जनता के बीच भी अच्छी छवि है।
गोलू शुक्ला: अपने क्षेत्र में काफी सक्रिय हैं। व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों की मदद कर देते हैं। मुख्यमंत्री के पसंदीदा विधायक हैं। यदि विस्तार में मंत्री नहीं बन पाए तो इसका कारण उनके सुपुत्र होंगे। उनकी बड़ी कहानी वायरल होती रहती हैं।
रीति पाठक: बिना क्षेत्र में भाजपा का प्रमुख चेहरा है। महिलाएं और लोकसभा से विधानसभा में आई है। मतलब मंत्री पद पर तो हक बनता है।
भगवान दास सबनानी: विधानसभा में ऐसा कुछ नहीं किया जिसके कारण जनता प्रसन्न हो लेकिन सामाजिक स्थिति का फायदा मिल सकता है। पार्टी संगठन और सरकार के साथ लगातार सक्रिय हैं। स्वयं को पार्टी का निष्ठावान कार्यकर्ता प्रमाणित कर चुके हैं।
यह लिस्ट अपडेट की जा रही है... कृपया कुछ समय बाद फिर से विकसित करें और यदि आपको लगता है कि कोई विधायक इस क्राइटेरिया में फिट बैठता है तो कृपया X अथवा फेसबुक पर कमेंट करें।

.webp)