भोपाल समाचार, 22 जून 2026: मध्य प्रदेश सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं शुरू हो गई है। स्वयं मुख्यमंत्री ने बताया कि वह अपनी टीम में किस प्रकार के मंत्री चाहते हैं। इधर पांच विधायक मंत्री पद की देश में सबसे तेज दौड़ रहे हैं। उन्होंने हर संभव प्रयास शुरू कर दिए हैं। मीडिया के माध्यम से दावेदारी भी शुरू कर दी है।
बृजेंद्र प्रताप सिंह: चार बार के विधायक लेकिन दामन पर दाग भी है
मध्य प्रदेश के पन्ना विधानसभा क्षेत्र से लगातार चौथी बार विधायक हैं। बुंदेलखंड में पन्ना और पवई क्षेत्र में सक्रिय है। दिल्ली कॉलेज इंदौर से बीकॉम एलएलबी पढ़ाई की है। बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड भी मिला था। 2003 से लगातार विधायक हैं और दो बार मंत्री रह चुके हैं। 6 करोड़ की संपत्ति है और कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, लेकिन दामन पर कुछ दाग भी है। भोपाल में इनके मकान से हनी ट्रैप मामले वाली श्वेता जैन को गिरफ्तार किया गया था। पन्ना राजघराने की राजमाता जीतेश्वरी देवी नवीन के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे। कांग्रेस के डॉ गोविंद सिंह ने उनके भाई पर रेत ठेकेदारी और गोलीकांड का आरोप लगाया था। 2020 में पन्ना में डिफेंस की जमीन पर कब्जा करने का आरोप भी लगा था।
अर्चना चिटनिस: शुगर मिल मंडी कांड अभी भी पेंडिंग है
अर्चना चिटनीस को कौन नहीं जानता। एक विधायक के अलावा भी उनकी बड़ी पहचान है। भाजपा में अर्चना दीदी कहते हैं। एमएससी, B.Ed और LLB तक पढ़ाई की है। 2003 से लगातार विधायक है और महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा आदि विभागों की मंत्री रह चुकी हैं। एक तरह से देखा जाए तो सीएम मैटेरियल है। 3 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति और कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है लेकिन 2003 का शुगर मिल कांड अभी तक क्लियर नहीं हुआ है। 2018 में चुनाव हारने के बाद बयान दिया था कि “जिन्होंने वोट नहीं दिए, उन्हें रुलाऊंगी/अफसोस होगा”। यह धमकी भरा वीडियो वायरल भी हुआ था। मतलब सीनियर नेता हैं लेकिन पेशेंस की कमी है। सुमित्रा ताई वाली बात नहीं है, उमा भारती जैसा नेचर है।
रीति पाठक: विरोधियों की पसंद लेकिन अपनों से संघर्ष
मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र (सीधी-सिंगरौली) की प्रमुख भाजपा महिला नेता हैं। वे 2014 और 2019 में सीधी लोकसभा सीट से सांसद रहीं और 2023 में सीधी विधानसभा से विधायक चुनी गईं। एमए एलएलबी की पढ़ाई की है। पार्टी की अनुशासित कार्यकर्ता है और सरकार में भी अनुशासनहीनता का कोई आरोप नहीं है। 8 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है। कोई गंभीर आपराधिक मामला नहीं है, लेकिन COVID के समय नियमों का उल्लंघन किया जिसके कारण आईपीसी 188 के तहत मामला दर्ज हुआ, इसके अलावा कुछ और भी नेगेटिव है:-
पार्टी के प्रति निष्ठा दिखाने के लिए छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले को छोटी सी गलती कहा था।
विंध्य क्षेत्र में अपनी ही पार्टी के नेताओं के साथ संघर्ष की खबरें आती रहती हैं। कुल मिलाकर प्रीति पाठक के खाते में ना तो कोई बड़ी उपलब्धि है और ना ही कोई बड़ा कांड।
प्रभुराम चौधरी: योग्यता, अनुभव और जाति नहीं सिर्फ सिंधिया
वैसे उनकी समीक्षा करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि श्री प्रभु राम चौधरी यदि मंत्री बनेंगे तो सिंधिया कोटे से बनेंगे, मतलब यदि श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को कोटा मिला, और उन्होंने चाहा तो श्री प्रभु राम चौधरी मंत्री बनेंगे नहीं तो नहीं बनेंगे। इसमें उनकी योग्यता, समीकरण और वरिष्ठता से कोई संबंध नहीं है।
मालिनी गौड़: संतान के कारण समीकरण बिगड़ सकते हैं
कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में एक सीट इंदौर के लिए आरक्षित होगी। सुपुत्र श्री के कारण गोलू शुक्ला की संभावना कम लगती है, शायद इसीलिए मालिनी गौड़ की तरफ से दौड़ धूप शुरू हो गई है। मालिनी गौड़ बीच चौथी बार विधायक हैं। इंदौर यूनिवर्सिटी से BA किया है। लगभग 5 करोड़ संपत्ति है और कोई गंभीर आपराधिक मामला नहीं है लेकिन उनके सुपुत्र श्री एकलव्य सिंह गौड़ अपने आप में एक बड़ा मुद्दा है। पार्टी लाइन की आड़ में दादागिरी करते हुए दिखाई देते हैं। यदि माता जी को पावर मिल गई तो चिरंजीव क्या-क्या करेंगे कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।

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