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चोरों या लुटेरों की सहायता करना किस धारा के अंतर्गत अपराध है, जानिए - ASK IPC

अगर आप किसी चोर या लुटेरों को जानते हैं या आपका ऐसा व्यक्ति मित्र हैं जो चोरी का काम करता है, और आप उसको जानते हैं। ओर जानबूझकर उसका साथ देगे या उसके चोरी के समान को अपने पास छिपा कर भी रखते हैं तो आप भी एक गंभीर अपराध करते हैं। अगर पुलिस को यह पता चलता है कि कोई चोर जिसे आप जानते हैं कि वह चोरी या लूट करके आकर आपके घर पर ठहरा हुआ है तो आपको भी पुलिस गिरफ्तार कर सकती है जानिए किस धारा के अंतर्गत यह अपराध कायम होगा।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 414 की ओर परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी चोर या लुटेरों का साथ देगा, छिपाकर रखेगा, या चोरी की संपत्ति को छिपा देगा। तब चोर या लुटेरों का साथ देने वाला व्यक्ति धारा 414 के अंतर्गत दोषी होगा।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 414 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा का अपराध समझौता योग्य होता है उस व्यक्ति से जिसकी संपत्ति चुराई गई हो। यह अपराध संज्ञेय एवं अजमानतीय अपराध होते हैं। इनकी सुनवाई कोई भी मजिस्ट्रेट कर सकता है। सजा- तीन वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। 

उधरणानुसार वाद:- हरिसिंह बनाम सम्राट वाद-

एक टैक्सी ड्राइवर कुछ यात्रियों को लेकर टेक्सी में जा रहा था। रास्ते में किसी अज्ञात कारणवश जब टेक्सी एक जगह रुकी तो उसमें से दो यात्री उतरे और उन्होंने वहां से तीन चार गज दूर खड़े एक व्यक्ति को लूट कर। वे दोनों टेक्सी में वापस आकर बैठ गए तथा ड्राइवर ने लुटे गए व्यक्ति की चीख पुकार की अनदेखी करते हुए टेक्सी को तेज गति से आगे बढ़ा दी। न्यायालय ने लुटेरों की लूट में सहायता करने के अपराध में ड्राइवर को धारा 414 के अन्तर्गत दोषी ठहराया। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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