प्रेस्टीज कंपनी के डुप्लीकेट ओवन BHOPAL में बिक रहे थे, दो व्यापारी गिरफ्तार - MP NEWS

Bhopal Samachar
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भोपाल
। देश की प्रतिष्ठित कंपनी प्रेस्टीज के डुप्लीकेट ओवन भोपाल में बेचे जा रहे थे। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पिपलानी थाना पुलिस ने प्रेस्टीज कंपनी की शिकायत पर दो व्यापारियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 196 कार्टून डुप्लीकेट माल बरामद हुआ है। पुलिस का कहना है कि दोनों व्यापारी लंबे समय से बाजार में प्रेस्टीज कंपनी के डुप्लीकेट ओवन की सप्लाई कर रहे थे।

संजय बरतन भंडार गांधी मार्केट भोपाल में पुलिस का छापा

पिपलानी पुलिस के अनुसार गंजबासौदा में रहने वाले अजय देवलिया आरके एंड एसोसिएट ऑफिस के फील्ड ऑफिसर हैं। उनका दिल्ली में ऑफिस है। उन्होंने पुलिस को एक लिखित शिकायत दी थी। इसमें उन्होंने बताया कि भोपाल के पिपलानी स्थित गांधी मार्केट में संजय बर्तन भंडार नाम से एक शॉप है। इसमें प्रेस्टिज कंपनी के कार्टून में नकली ओवन रखकर बेचे जा रहे हैं। पुलिस ने शिकायत की पड़ताल के बाद गांधी मार्केट में संजय बर्तन भंडार पर छापा मारकर माल जब्त कर लिया।

दुकानदार विपुल ताम्रकार गिरफ्तार

यह दुकान सोनागिरी निवासी 28 साल के विपुल ताम्रकार पिता विष्णु प्रसाद ताम्रकार की थी। पुलिस ने मौके से 11 डुप्लीकेट ओवन बरामद कर विपुल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि विपुल ताम्रकार केवल एक विक्रेता है। उसे डुप्लीकेट माल की सप्लाई पूछताछ के दौरान पता चली।

आदिनाथ ट्रेडर्स इतवारा भोपाल पर पुलिस का छापा, प्रमेश तारण गिरफ्तार

पुलिस ने विपुल की निशानदेही पर माल की सप्लाई करने वाले आदिनाथ ट्रेडर्स इतवारा रोड पहुंचकर दुकान मालिक 45 साल के कारोबारी प्रमेश तारण पिता शीलचंद तारण को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके गोदाम से 185 के कार्टून जब्त किए। यह सभी माल नकली था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कॉपीराइट एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

प्रेस्टीज कंपनी के डुप्लीकेट ओवन लंबे समय से बेचे जा रहे थे

पुलिस के अनुसार ऐशबाग निवासी रमेश तारण डुप्लीकेट ओवन की सप्लाई करता है। वह दुकान में कम कीमत में उन्हें बेच देता था और दुकानदार इन्हें ग्राहकों को दे देते थे। काफी मार्जन मिलने के कारण लंबे समय से डुप्लीकेट माल बेचा रहा था। कंपनी को इसको लेकर काफी शिकायतें आई थीं।

कंपनी के कार्टून में भरकर रखते थे

आरोपी डुप्लीकेट ओवन तैयार कर उन्हें कंपनी के कार्टून में भरकर रखते थे। ओवन में कहीं भी नाम या टेगिंग नहीं होता था। कार्टून देखकर ही लोग माल ले लेते थे। लोगों को इनके डुप्लीकेट होने का एहसास तक नहीं होता था।

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