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UJJAIN में कोरोना से मुक्ति के लिए कलेक्टर/SP ने माता के मंदिर में शराब चढ़ाई / MP NEWS

उज्जैन। इंदौर और भोपाल के बाद उज्जैन मध्य प्रदेश का तीसरा ऐसा जिला है जो कोरोनावायरस का परमानेंट एड्रेस बना हुआ है। तमाम कोशिशों के बाद भी जिला प्रशासन एवं डॉक्टरों की फौज कोरोनावायरस को उज्जैन से भगाने में नाकाम साबित हुई है। इसी के चलते हैं शनिवार काे कलेक्टर-एसपी ने चौबीस खंभा माता मंदिर पहुंच कर माता को मदिरा का भोग अर्पित किया और उज्जैन को कोरोनावायरस महामारी से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। 

लाॅकडाउन के कारण टूट गई थी परंपरा, अब माता को मनाने के प्रयास

शनिवार काे उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह चौबीस खंभा माता मंदिर पहुंचे और पूजन के बाद मां काे मदिरा का भाेग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत की। उन्होंने मां से उज्जैन को महामारी से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। खास बात यह है इस मंदिर में नवरात्रि की अष्टमी पर मदिरा चढ़ाने की परंपरा सालाें से चली आ रही है, इस साल लाॅकडाउन के कारण इस परंपरा का निर्वहन नहीं हो पाया था।

उज्जैन स्थित चौबीस खंभा माता मंदिर की पूजन परंपरा

परंपरा के अनुसार, महामारी से बचने के लिए राजा विक्रमादित्य शहर स्थित चौबीस खंभा माता मंदिर पर मदिरा चढ़ाकर पूजन अभिषेक करते थे। नगर पूजा की यह परंपरा उसी समय से चली आ रही है। शनिवार को कलेक्टर आशीष सिंह, एसपी मनोज सिंह मां के दरबार पहुंचे। सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी में ढोल-बाजों के साथ गुदरी स्थित माता मंदिर से नगर पूजा की शुरुआत हुई। कलेक्टर ने मदिरा की धार चढ़ाकर पूजा शुरू की। यह पूजा माता, भैरव और हनुमान मंदिर समेत कुल 40 मंदिरों में हुई। 26 किलोमीटर की पैदल यात्रा के पूरे होने के बाद इस पूजा में 5 किलो सिंदूर, दो डिब्बे तेल, 25 बोतल मदिरा समेत 39 प्रकार की विशेष पूजन सामग्री रखी जाती है।

1000 साल पुराने मंदिर में ऐसे शुरू होती है पूजा

नवरात्रि में महाअष्टमी पर जहां घरों में माता के भक्त कुलदेवी का पूजन करते हैं, वहीं उज्जैन प्रशासन द्वारा नगर पूजा का आयोजन किया जाता है। खुद कलेक्टर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में महाअष्टमी के दिन सुबह गुदरी चौराहा स्थित चौबीस खंभा माता मंदिर में मदिरा की धार चढ़ाकर नगर पूजन की शुरुआत करते हैं। इसके बाद महाअष्टमी पर शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर पर दोपहर 12 बजे शासकीय पूजा होती है। यह नगर पूजा अंकपात मार्ग स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर रात 8 बजे समाप्त होती है। हालांकि, इस बार यह पूजा नवरात्रि पर नहीं होने से शनिवार को संपन्न हुई।

मां से देश के कल्याण के लिए प्रार्थना की 

कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि उज्जैन में गौरवशाली परंपरा है। राजा विक्रमादित्य के समय से यह परंपरा चली आ रही है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल नगर के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के कल्याण के लिए प्रार्थना करना होता है। उसी परंपरा का पालन करते हुए मेरे द्वारा यह पूजा की गई। कोरोनावायरस का जो दौर चल रहा है, उज्जैन हो या प्रदेश या पूरा देश, उससे जल्दी मुक्ति मिले। इसी कामनाओं के साथ यह पूजा की गई है। परंपरा के अनुसार पहले मंदिर में कलेक्टर के द्वारा पूजा की जाती है। बाकी मंदिर में तहसीलदार और पटवारी द्वारा पूजा का प्रावधान है। पूजा का जो उद्देश्य था, कोरोना को भगाने में सफल होंगे। 

बाबा महाकाल और मां कोरोना से मुक्ति दिलाएंगी

एसपी मनोज सिंह ने कहा कि इस सृष्टि का संचालन ईश्वर की कृपा से हो रहा है। त्रासदी या विपदा से मुक्ति के लिए नगर पूजा हमारी परंपरा रही है। नगर पूजा करके हम लोग भगवान से प्रार्थना करते हैं। हमने बाबा महाकाल से, सभी देवी-देवताओं से प्रार्थना की है कि हमारे शहर को सारे जगत को इस महामारी से मुक्ति प्रदान करें। वहीं, 24 खांभा माता मंदिर के पंडित ने कहा कि जब-जब शहर में विपदाएं आती हैं तो चैत्र नवरात्रि में महामाया की पूजा प्रशासन द्वारा की जाती है और आज कोरोनावायरस महामारी से बचने के लिए यह पूजा की गई है।

चौबीस खंभा माता मंदिर में देवी की प्रतिमा को शराब का भोग क्यों लगाया जाता है

महाकाल वन के मुख्य प्रवेश द्वार पर विराजित माता महामाया और माता महालाया चौबीस खंभा माता मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं। यहां पर मंदिर के भीतर 24 काले पत्थरों के खंभे हैं, इसीलिए इसे 24 खंभा माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह उज्जैन नगर में प्रवेश करने का प्राचीन द्वार हुआ करता था। पहले इसके आसपास परकोटा हुआ करता था। तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध उज्जैन या प्राचीन अवंतिका के चारों द्वार पर भैरव तथा देवी विराजित हैं, जो आपदा-विपदा से नगर की रक्षा करते हैं। चौबीस खंभा माता भी उनमें से एक हैं। यह मंदिर करीब 1000 साल पुराना है। नगर की सीमाओं पर स्थित इन देवी मंदिरों में राजा विक्रमादित्य के समय से नगर की सुरक्षा के लिए पूजन और मदिरा चढ़ाए जाने की परंपरा चली आ रही है।

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