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मध्यप्रदेश: चुनावी ऊंट की करवट के अनुमान | EDITORIAL by Rakesh Dubey

मध्यप्रदेश विधान सभा के चुनाव नजदीक हैं, वैसे तो चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा, अभी से कहना मुश्किल है। पक्ष और प्रतिपक्ष के अलावा कई अनुमान बाज़ार में तैरने लगे है। नेशनल हेराल्ड में छपा एक सर्वे इस समय चर्चा में है। इन प्रारम्भिक सर्वे का क्या ? कोई सर्वे लम्बे समय से सत्ता विहीन कांग्रेस के प्रयासों को यथेष्ट मान अगली विधान सभा में सत्ता पक्ष की कुर्सियों पर काबिज होने की बात कह रहा है तो किसी का अनुमान सुगमता से भाजपा सरकार की वापिसी का है। इस प्रकार के सर्वे दोनों प्रमुख दलों के कार्यालयों में रोज़ चर्चा के विषय होते हैं और हवाई खबरें भी इन्ही से उड़ती है। पिछले दिनों कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों की सूचियाँ हवा में तैरीं। बाद में इसे हवा माना गया और कांग्रेस के प्रचार विभाग में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। भाजपा में भी ऐसा परिवर्तन जल्द देखने में आ सकता है, अमित शाह की 40 सदस्यीय टीम महत्वपूर्ण सूत्र हाथ में लेने भोपाल में आ डटी है।

दलों के प्रचार और प्रोपेगंडा के अतिरिक्त कुछ स्वतंत्र अनुमान भी आना शुरू हुए हैं। स्पिक इण्डिया नामक एक संस्था का सर्वे “नेशनल हेराल्ड” में छपा है, सबसे ताजा है। इसमें बसपा के साथ और बसपा के बगैर कांग्रेस की स्थिति का विश्लेष्ण है। प्रदेश की 230 सीटों पर कांग्रेस दोनों स्थिति में 115 सीटों के जादुई आंकड़े को न छू पाने की बात यह सर्वे कहता है। सर्वे अनुमान है कि बसपा से गठ्बन्धन के बाद कांग्रेस को 103 और गठ्बन्धन के बगैर 73 सीटें मिलेंगी। भाजपा को दोनों सूरत में स्पष्ट बहुमत की बात भी यह सर्वे करता है। स्पिक इण्डिया का यह सर्वे कान्ग्रेस की राजा- महाराजा टीम को चैतन्य बनाने का प्रयास भी हो सकता है। यह अलग बात है कि नेशनल हेराल्ड प्रसार मध्यप्रदेश में उँगलियों पर गिना जा सकता है।

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर इस विषयक एक और सर्वे प्रसारित हुआ था। जिसमें भाजपा के जीतने की बात तो कही गई थी पर जीत के जादुई आंकड़े 115 के एकदम नजदीक प्रतिपक्ष की बात कही गई थी। दोनों के बीच का फासला इतना कम बताया गया था कि गुजरात विधानसभा के नतीजे याद आ रहे थे। यह सर्वे जन आशीर्वाद यात्रा के पहले और न्याय यात्रा के दौरान का था। जन आशीर्वाद यात्रा और न्याय यात्रा से दोनों पक्ष अपने माहौल को सुधरने का दावा करने लगे हैं। भाजपा का चेहरा शिवराज है, इसके विपरीत कांग्रेस में चेहरा तय होने से मारपीट तक नौबत देखने में आ रही है। नेशनल हेराल्ड में छपे इस सर्वे के बाद कांग्रेस में सिंधिया खेमा ज्योतिरादित्य को चेहरा बनाने की पैरवी जोरों से कर रहा है। प्रदेश के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री के साथ आज दिल्ली में कुछ लोग राहुल गाँधी से भी मिलने वाले हैं।

न्याय यात्रा की तुलना में जन आशीर्वाद यात्रा में भीड़ ज्यादा है, लेकिन भीड़ मतदान के दिन तक कायम रहेगी ऐसा कोई भी गारंटी के साथ नहीं कह सकता। इतिहास गवाह है, भीड़ ज्यादा दिखने से जीत के कई पूर्वानुमान ध्वस्त भी हुए हैं। वैसे अभी समय है, उम्मीदवार, दल और उसकी शैली नतीजे पलटती है। ऐसा भी हुआ है।
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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