भोपाल, 13 जनवरी 2026: नगर निगम भोपाल के स्लाटर हाउस में गोकशी की पुष्टि होने के बाद मंगलवार को पूरे दिन हंगामा मचा रहा। लोग काफी आक्रोशित थे, क्योंकि यह मामला लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। नगर निगम की परिषद बैठक में भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने महापौर को घेर लिया, जिसके बाद स्पीकर किशन सूर्यवंशी ने विवादित स्लाटर हाउस को हमेशा के लिए बंद करने की घोषणा कर दी। साथ ही, तय किया गया कि अब भोपाल शहर में कोई जानवर नहीं काटा जाएगा। वहीं, भोपाल संभाग के कमिश्नर संजीव सिंह ने नगर निगम के पशु चिकित्सक और स्लाटर हाउस के प्रभारी डॉ. बेनी प्रसाद गौर को निलंबित कर दिया। इनकी जिम्मेदारी थी कि कटने वाले पशुओं को प्रमाणित करें, लेकिन आरोप है कि वे कभी स्लाटर हाउस जाते ही नहीं थे।
भोपाल से दूसरे प्रदेशों में गोमांस सप्लाई किया जाता था
यह सब तब शुरू हुआ जब नगर निगम के स्लाटर हाउस से दूसरे प्रदेशों को भेजे जा रहे मांस में गोमांस की पुष्टि हुई। पिछले कुछ दिनों से रोज प्रदर्शन हो रहे हैं, और मंगलवार को भी अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद, राष्ट्रीय बजरंग दल और जय मां भवानी हिन्दू संगठन ने सड़कों पर उतरकर गोकशी के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। परिषद बैठक में हंगामे के बाद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने जानवरों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया, साथ ही ठेका एजेंसी को स्थायी रूप से ब्लैक लिस्टेड करने और आरोपी डॉक्टर सहित 11 कर्मचारियों को हटाने का निर्णय लिया।
स्लाटर हाउस संचालक असलम कुरैशी गिरफ्तार
बता दें कि यह कांड 17 दिसंबर की रात को सामने आया, जब हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय के सामने यूपी रजिस्ट्रेशन नंबर वाले एक कंटेनर को रोका। उसमें 26 टन मांस लदा था, जो भोपाल नगर निगम के अत्याधुनिक स्लाटर हाउस से लोड होकर निकला था। जांच में गोमांस होने की पुष्टि हुई, और 7 जनवरी को पुलिस ने गोवध निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर स्लाटर हाउस संचालक असलम कुरैशी और कंटेनर चालक को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने पूरे शहर में तनाव पैदा कर दिया है, और लोग अब सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं कि कैसे सरकारी निगरानी में ऐसी घटना हो गई।
नगर निगम ने 35 करोड़ की लागत से माडर्न स्लाटर हाउस बनाया था
इस विषय से संबंधित अन्य जानकारी के अनुसार, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने डॉ. बेनी प्रसाद गौर को तुरंत सस्पेंड करने का आदेश दिया है, क्योंकि वे गौ-मांस को बफेलो मीट बताने में शामिल थे। कांग्रेस ने इस पर प्रोटेस्ट किया और इसे नगर निगम अधिकारियों और भाजपा नेताओं की मिलीभगत बताया। साथ ही, HMA ग्रुप का नाम भी सामने आया है, जो इस कांड से जुड़ा लगता है। नगर निगम ने 35 करोड़ रुपये से बने इस मॉडर्न स्लाटर हाउस को एक महीने पहले ही शुरू किया था, लेकिन निगरानी फेल होने से यह विवादों में घिर गया।
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