CM Sir, प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की योग्यता की जांच एवं अयोग्य शिक्षक होने पर मान्यता रद्द कीजिए

Updesh Awasthee
माननीय मुख्यमंत्री महोदय
, सविनय निवेदन है कि प्रदेश के अनेक निजी विद्यालयों द्वारा शिक्षा के नाम पर व्यवसाय किया जा रहा है। इन विद्यालयों में योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की उपेक्षा कर अत्यंत कम मानदेय पर शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता एवं शिक्षकों के सम्मान, दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

वर्तमान में अनेक निजी विद्यालय संचालक मात्र ₹2,500 से ₹3,000 प्रतिमाह के वेतन पर शिक्षकों से कार्य करा रहे हैं। महँगाई के इस दौर में इतनी अल्प राशि में किसी शिक्षक के लिए अपने परिवार का भरण-पोषण एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना अत्यंत कठिन है। यह स्थिति शिक्षकों के आर्थिक शोषण को दर्शाती है।

चिंता का विषय यह भी है कि कई निजी विद्यालय लागत कम करने के उद्देश्य से केवल 12वीं उत्तीर्ण अथवा बी.ए./बी.एससी. अध्ययनरत विद्यार्थियों को बहुत कम वेतन पर नियुक्त कर लेते हैं। इसके विपरीत स्नातक, स्नातकोत्तर, बी.एड. एवं टी.ई.टी. जैसी आवश्यक योग्यताएँ प्राप्त प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसर नहीं दिए जाते। इससे योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षक बेरोजगार रहने को विवश हैं तथा शिक्षा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर, यही विद्यालय अभिभावकों से ₹15,000 से ₹20,000 अथवा उससे अधिक वार्षिक शुल्क वसूलते हैं, लेकिन न तो योग्य शिक्षकों की नियुक्ति करते हैं और न ही उनके अनुरूप वेतन देते हैं। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि कुछ विद्यालय संचालक शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय के रूप में संचालित कर रहे हैं। ऐसे विद्यालय बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि - 
प्रदेश के निजी विद्यालयों में शिक्षकों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं तथा वेतनमान की व्यापक जाँच कराई जाए।
न्यूनतम निर्धारित मानकों एवं योग्यताओं का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
जिन विद्यालयों में आवश्यक योग्यता वाले शिक्षक नियुक्त नहीं हैं अथवा शिक्षा संबंधी मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है, उनकी मान्यता की समीक्षा कर आवश्यक होने पर निरस्त करने की कार्रवाई की जाए।
निजी विद्यालयों में शिक्षकों के लिए न्यूनतम सम्मानजनक वेतन सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनके आर्थिक शोषण पर रोक लग सके।
यह सुनिश्चित किया जाए कि योग्य एवं प्रशिक्षित (स्नातक, स्नातकोत्तर, बी.एड., टी.ई.टी. उत्तीर्ण) अभ्यर्थियों को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।
आशा है कि प्रदेश के शिक्षकों के हितों एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर विषय पर शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई करने का कष्ट करेंगे।

सादर,
योग्य एवं प्रशिक्षित बेरोजगार युवक संघ

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