CM मोहन की नॉलेज के सामने AI भी फेल हो गया, अधिकारियों को बताया कि यूज कैसे करना है

Updesh Awasthee
भोपाल, 3 जुलाई 2026:
यह समाचार केवल उन 2% लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो नॉलेज, रिसर्च और मेंटल एक्सरसाइज की वैल्यू समझते हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की फोटो देखकर कोई कुछ भी गए लेकिन गुरुवार को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की बैठक में उन्होंने अपनी नॉलेज के सामने AI को भी फेल कर दिया और उसके बाद मीटिंग में मौजूद दिग्गज प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि AI का उपयोग किस प्रकार किया जाना चाहिए। 

CM Mohan Yadav Stuns Officials with AI Insights, Explains How to Use It

बैठक में प्राधिकरण द्वारा प्रेजेंटेशन दिया जा रहा था। इसमें उज्जैन की शिप्रा नदी का नाम "क्षिप्रा" लिखा हुआ था। डॉ मोहन यादव ने अधिकारियों को तत्काल टोका और बताया कि "क्षिप्रा" तो किसी भी नदी का नाम नहीं है, यह कहां से आई। जब नॉलेज के ग्राउंड पर चलेंगे करो तो अधिकारियों का ईगो इशू बना जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि, उज्जैन की नदी जिसे लोग शिप्रा कहते हैं, उसका सही और असली नाम "क्षिप्रा" ही है। डॉ मोहन ने इसका आधार पूछा तो उन्होंने AI (ChatGPT और Google Gemini) से प्रश्न पूछा और उत्तर मुख्यमंत्री के सामने रख दिया। दोनों AI ने बताया था कि उज्जैन में बहने वाली नदी का आधुनिक हिंदी नाम शिप्रा है, जबकि क्षिप्रा उसका संस्कृत मूल नाम है। क्षिप्रा (Kshipra): संस्कृत शब्द 'क्षिप' (Kship) से बना है, जिसका अर्थ है 'तेजी से बहने वाली' या 'शीघ्रगामी'। यह नदी के स्वभाव को दर्शाता है। 

मुख्यमंत्री ने ध्यानपूर्वक उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए उत्तर को पढ़ा और फिर प्रति प्रश्न किया। उन्होंने बताया कि शिप्रा नदी तो मंथर नदी है। अर्थात धीमी गति से बहने वाली नदी है, फिर इसका नाम क्षिप्रा कैसे हो सकता है?। अधिकारियों को किसी नेता से इस तरह के प्रति प्रश्नों की उम्मीद नहीं होती। उनको लगता है कि नेता तो बस केवल वह वाली बातें करते हैं, नॉलेज, रिसर्च और मेंटल एक्सरसाइज नेताओं के बस की बात नहीं है, लेकिन मीटिंग में तो यह सब कुछ शुरू हो चुका था। अब अधिकारियों के पास कोई उत्तर नहीं था क्योंकि उनको पता ही नहीं था उज्जैन में बहने वाली नदी "क्षिप" नहीं बल्कि "मंथर" है। वह प्राधिकरण में काम तो कर रहे थे लेकिन उन्होंने कभी नदी से मुलाकात ही नहीं की थी। 

फिर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उन्हें थोड़ा रिलैक्स करते हुए कहा कि अपने AI से यजुर्वेद और कालिदास के आधार पर पूछो कि उज्जैन की नदी का नाम क्या है। जब प्रश्न को बदलकर किया गया तब स्पष्ट हुआ। यजुर्वेद में 'शिप्रेः अवेः पत्रः' कहकर ऋषियों ने इसका स्मरण किया। रघुवंश में कालिदास ने इंदुमती स्वयंवर के प्रसंग में 'शिप्रातरंगानिलकम्पि तासु' लिखा। कालिदास के मेघदूत में 'शिप्रावातः प्रियतम इवं प्रार्थनाचाटुकारः" यानि शिप्रा से उठने वाली पवन का जिक्र है। 

जो लोग नॉलेज, रिसर्च और मेंटल एक्सरसाइज की वैल्यू नहीं समझते वह कहेंगे कि नाम से क्या होता है। नाम को सही कर देने से वाटर लेवल थोड़े ही बढ़ जाएगा। कुछ महाज्ञानी तो यह भी कहेंगे कि, यह बात तो शिप्रा नदी के किनारे रहने वाले बाबो को भी पता है, लेकिन यह घटनाक्रम वास्तव में यह प्रमाणित करता है कि, नॉलेज और रिसर्च के लिए AI का उपयोग करना निरी मूर्खता है। AI का उपयोग केवल मेंटल एक्सरसाइज के लिए किया जाना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों ने नॉलेज के लिए AI का उपयोग किया जबकि डॉ मोहन यादव AI की बुद्धि परीक्षा ले रहे थे।

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