भोपाल में आधे घंटे की बारिश हुई और शहर तालाब हो गया, यदि मूसलाधार हुई तो क्या होगा

Updesh Awasthee
भोपाल, 3 जुलाई 2026:
अभी तो शहर के आसमान पर मानसून के बादल ठीक से छाए भी नहीं है। पहली बार शहर में आधे घंटे की बारिश हुई और शहर के कई इलाके तालाब में बदल गए। इस बार अनियमित बारिश होने की संभावना है। मतलब अचानक मूसलाधार बारिश होगी और अचानक बंद होने के बाद धूप निकल आएगी। यदि सचमुच ऐसा हो गया तो शहर का क्या होगा? 

भोपाल में नाला सफाई घोटाला हुआ है?

नगर निगम जिन पातरा, भदभदा, शाहपुरा और कलियासोत जैसे प्रमुख नालों की सफाई का दावा कर रहा था, उनके कैचमेंट क्षेत्रों में स्थिति जस की तस बनी हुई है। सवाल तो करना पड़ेगा कि क्या केवल सरकारी डाक्यूमेंट्स में नालों की सफाई हुई? क्या भोपाल में नाला सफाई के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया है? एमपी नगर, अरेरा हिल्स और चार इमली जैसे क्षेत्रों में सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लिंक रोड-3 और सात नंबर तिराहे जैसे प्रमुख रास्तों पर जलभराव के कारण घंटों जाम की स्थिति बनी रही। 

12 करोड़ के नाला निर्माण में भी गड़बड़ी

सिस्टम की लापरवाही का सबसे बड़ा नमूना नरेला और गोविंदपुरा विधानसभा के बीच बन रहा नाला है। इस नाले के निर्माण पर अब तक 12 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन नरेला क्षेत्र में एक किलोमीटर का हिस्सा अधूरा होने के कारण उड़िया बस्ती और सुंदर नगर जैसे इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए। गोविंदपुरा में तो नाला पक्का कर दिया गया, लेकिन नरेला में काम अधूरा रहने से पानी का दबाव बढ़ते ही बैकवॉटर बस्तियों में घुस रहा है। 

भोपाल वार्ड 10 पार्षद सरोज असेरी की गुमशुदगी के पोस्टर लगे

प्रशासनिक सुस्ती से नाराज जनता अब सड़कों पर उतर आई है। वार्ड-10 में विकास कार्यों के ठप होने, सड़कों के गड्ढों और बंद स्ट्रीट लाइटों से परेशान लोगों ने पार्षद श्रीमती सरोज हरिओम आसेरी के खिलाफ ‘गुमशुदा पार्षद की तलाश’ के पोस्टर चस्पा कर दिए। हालांकि, विवाद बढ़ता देख भाजपा नेताओं ने इन पोस्टरों को तुरंत हटवा दिया, लेकिन इसने जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 

खतरनाक गड्ढे दे रहे हैं हादसों को न्योता

शहर की सड़कों की हालत यह है कि शैतान सिंह तिराहे पर पिछले चार साल से एक गहरा गड्ढा सीवेज लाइन की खुदाई के बाद से नहीं भरा गया है। मनीषा मार्केट और चूना भट्ठी के पास भी सड़कों की स्थिति जानलेवा बनी हुई है, जहाँ बारिश का पानी भरने के बाद गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। 

निष्कर्ष: नगर निगम के अधिकारी अब पुरानी पुलियाओं को हटाने और रिटेनिंग वॉल बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि यह 'जागृति' मानसून आने और जनता के डूबने के बाद ही क्यों आती है? क्या 12 करोड़ की लागत से बन रहे आधे-अधूरे नाले और सालों पुराने गड्ढे किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? 
Tags

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!