नई दिल्ली, 28 जुलाई 2026: हाईकोर्ट ने हाल ही में पायरेसी और कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। Home Box Office Inc & Ors v. Streamzy.to & Ors के मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न तो कॉपीराइट के मालिक और न ही इंटरनेट मध्यस्थ (Intermediaries) अकेले यह तय कर सकते हैं कि कोई वेबसाइट 'रॉग वेबसाइट' (Rogue Website) है या नहीं। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने अपने निर्णय में कहा कि हालांकि कॉपीराइट मालिकों को हर बार नई पायरेसी वेबसाइट सामने आने पर कोर्ट नहीं भागना चाहिए, लेकिन वेबसाइट को ब्लॉक करने का अंतिम निर्णय न्यायिक जांच (Judicial Scrutiny) के बाद कोर्ट के पास ही रहना चाहिए।
HBO बनाम Streamzy.to कॉपीराइट उल्लंघन सूट की पूरी जानकारी
यह मामला तब शुरू हुआ जब Home Box Office Inc (HBO) और अन्य प्रोडक्शन हाउस ने 30 वेबसाइटों के समूहों के खिलाफ मुकदमा दायर किया। इन वेबसाइटों पर आरोप था कि वे बिना किसी लाइसेंस या अधिकार के फिल्मों और टीवी शो की अवैध स्ट्रीमिंग कर रही थीं। HBO ने कोर्ट को बताया कि ये वेबसाइट्स फिल्मों के रिलीज होते ही, और कभी-कभी तो रिलीज से पहले ही उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध करा देती हैं। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया (prima facie) पाया कि ये वेबसाइटें 'फ्लैग्रेंटली इनफ्रिंजिंग ऑनलाइन लोकेशन्स' (FIOL) के सभी लक्षणों को पूरा करती हैं, क्योंकि इनके मालिक अपनी पहचान छिपाकर रखते हैं।
क्या हैं 'रॉग वेबसाइट' (Rogue Websites) और डिजिटल पायरेसी का खतरा?
कोर्ट के अनुसार, 'रॉग वेबसाइट्स' वे होती हैं जिनका प्राथमिक उद्देश्य कॉपीराइट उल्लंघन को बढ़ावा देना होता है। इन वेबसाइटों के पंजीकरण विवरण (Registrant details) अक्सर छिपे होते हैं और इनका कोई पता-ठिकाना नहीं होता। न्यायमूर्ति भंभानी ने पूर्व के UTV Software Communication Ltd. मामले का संदर्भ देते हुए कहा कि इंटरनेट पायरेसी एक मल्टी-बिलियन डॉलर का व्यवसाय है, जो विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन के जरिए पैसा कमाता है। कोर्ट ने माना कि डिजिटल दुनिया में किया गया अपराध भी उतना ही गंभीर है जितना भौतिक दुनिया में, और इसे रोकने के लिए सख्त न्यायिक नियंत्रण आवश्यक है।
Dynamic Injunction और न्यायिक जांच में संतुलन
अदालत ने स्वीकार किया कि पायरेसी वेबसाइटें अक्सर Mirror, Alphanumeric या Redirect डोमेन के जरिए खुद को फिर से जीवित कर लेती हैं, जिससे उन्हें रोकना एक "मूविंग टारगेट" का पीछा करने जैसा हो जाता है। हालांकि, कोर्ट ने HBO को ऐसी किसी भी वेबसाइट को सीधे ब्लॉक करने का 'कार्टे ब्लैंच' (Carte Blanche) या असीमित अधिकार देने से इनकार कर दिया। कोर्ट का मानना है कि एक इंटरनेट सर्विस प्रदाता (ISP) या डोमेन नाम रजिस्ट्रार (DNR) केवल एक तटस्थ मध्यस्थ होता है और उसका काम यह तय करना नहीं है कि कौन सी वेबसाइट अवैध है।
वेबसाइट ब्लॉक करने की नई प्रक्रिया: टेक्निकल वेरिफिकेशन और प्रो-टेम उपाय
कोर्ट ने एक नई कार्यप्रणाली (Procedure) विकसित की है ताकि न्याय और सुविधा के बीच संतुलन बना रहे। इस प्रक्रिया के तहत, यदि HBO को कोई नई मिरर वेबसाइट मिलती है, तो वह प्रमाणों के साथ ISP या DNR को एक हलफनामा (Affidavit) देगा। इसके बाद, मध्यस्थ (Intermediary) केवल तकनीकी सत्यापन (Technical Verification) करेगा कि क्या वह वेबसाइट वास्तव में पहले से प्रतिबंधित वेबसाइट का ही एक रूप है। यदि तकनीकी लिंक स्थापित हो जाता है, तो मध्यस्थ उसे एक अस्थायी उपाय (Pro-tem measure) के रूप में ब्लॉक कर देगा, और साथ ही HBO को उस वेबसाइट को मुख्य केस में शामिल करने के लिए कोर्ट में आवेदन करना होगा।
IT एक्ट की धारा 79 और इंटरमीडियरीज के लिए Safe Harbour
अदालत ने जोर देकर कहा कि इंटरनेट मध्यस्थों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत 'सेफ हार्बर' सुरक्षा प्राप्त करने के लिए तटस्थ रहना अनिवार्य है। यदि मध्यस्थों को खुद से यह तय करने की शक्ति दी जाती है कि क्या ब्लॉक करना है, तो यह उनके अर्ध-न्यायिक (Adjudicatory) कार्यों जैसा हो जाएगा, जिसके लिए वे अधिकृत नहीं हैं। साथ ही, कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि HBO द्वारा दिया गया कोई भी हलफनामा गलत या दुर्भावनापूर्ण पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कोर्ट ने पहचाने गए सभी 30 वेबसाइट समूहों के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा (Interim Injunction) जारी कर दी है।

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