भोपाल, 28 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग में ई-अटेंडेंस सर्वोच्च प्राथमिकता वाला मामला हो गया है। यह इतना अधिक महत्वपूर्ण है कि, गड़बड़ी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की जा रही है बल्कि आपराधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस थाने में मामला दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी गुना का विवादित आदेश
यह मामला मध्य प्रदेश के गुना जिले का है। जिला शिक्षा अधिकारी ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को आदेशित किया है कि, श्री सुनील कुमार माहौर, प्राथमिक शिक्षक, एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक शासकीय प्राथमिक विद्यालय चक मुसरेडी विकासखण्ड गुना के द्वारा शाला में दिनांक 16.04.26 से 18.07.26 तक अनाधिकृत अनुपस्थित रहते हुए हमारे शिक्षक साथी एप पर फर्जी ई-अटैडेंस किसी अन्यत्र लॉकेशन से लगाकर वेतन प्राप्त कर शासन से धोखाधड़ी का अपराध किया गया है। अतः संबंधित के विरुद्ध, संबंधित थाने में तत्काल एफआईआर दर्ज कराएं एवं एफआईआर की प्रति इस कार्यालय में प्रस्तुत करें।
ना नोटिस ना निलंबन, डायरेक्ट FIR
गुना के जिला शिक्षा अधिकारी भी गजब हैं। उन्होंने अपने आदेश में यह नहीं बताया कि उनको कैसे पता चला, दिनांक 16.04.26 से 18.07.26 तक शिक्षक द्वारा फर्जी ई-अटेंडेंस लगाई गई। माना कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी उनके अधीनस्थ है परंतु क्या वह पुलिस इंस्पेक्टर को भी अपने डिपार्टमेंट का टीचर समझते हैं। चार लाइन का आदेश जिस पर हस्ताक्षर हरे रंग से है, क्या लगता है इसके आधार पर पुलिस इंस्पेक्टर मामला दर्ज कर लेगा। यह आदेश अपूर्ण, विधि विरुद्ध और दहशत पैदा करने वाला है।
कहीं ऐसा तो नहीं कि, शिक्षकों से अवैध वसूली करने के लिए इस तरह का आदेश जारी किया गया है, ताकि विकासखंड शिक्षा अधिकारी चाह कर भी मामला दर्ज नहीं करवा पाए और संबंधित शिक्षक, जिला शिक्षा अधिकारी की शरण में चला आए। यदि ऐसा नहीं है तो जिला शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट करना चाहिए कि किस कानून के तहत उनको यह अधिकार मिला कि वह इस तरह के मामले में, कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दे सकते हैं?

.webp)
