भोपाल, 20 जुलाई 2026: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मुख्य रूप से श्री आशुतोष सिंह और राजा घनश्याम सिंह मुकाबले में है। इलेक्शन एफिडेविट में दोनों प्रत्याशियों ने अपनी पत्नियों के बारे में भी जानकारी दी है। इलेक्शन एफिडेविट की लैंग्वेज को पब्लिक समझ नहीं पाती है इसलिए हम सरल भाषा में वही जानकारी और उसके पॉलिटिकल मायने बताने जा रहे हैं:-
1. आशुतोष तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी की संपत्ति का विवरण
पेशा और आय: इनका मुख्य पेशा कृषि और घरेलू कार्य है। वित्तीय वर्ष 2024-25 (कर निर्धारण वर्ष 2025-26) के आयकर रिटर्न के अनुसार इनकी कुल वार्षिक आय ₹5,56,643 थी।
चल संपत्ति: इनके पास कुल ₹44,84,831 की चल संपत्ति है। इसमें ₹42,600 नकद और विभिन्न बैंकों (HDFC, PNB, IOB) में लगभग ₹92,231 जमा हैं। इनके पास 312 ग्राम सोना है, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग ₹43,50,000 है।
अचल संपत्ति: इनके पास आशुतोष तिवारी से अधिक अचल संपत्ति है। इनके नाम पर विभिन्न गांवों (जैसे मोहनजाट, ख्लरिया, दभैरा और चिमघन) में कृषि भूमि है, जिसका कुल वर्तमान बाजार मूल्य ₹1,31,37,900 है।
देनदारी (Loan): उन पर इंडियन ओवरसीज बैंक से लिया गया ₹17,95,690 का गोल्ड लोन बकाया है।
कल्पना तिवारी हाउसवाइफ नहीं जमीदार हैं
इलेक्शन एफिडेविट में दी गई डिटेल से स्पष्ट हो गया है कि, श्रीमती कल्पना तिवारी, जिनको पब्लिक हाउसवाइफ के रूप में जानती है, एक्चुअल में जमादार हैं। चार गांव में लगभग डेढ़ करोड़ की जमीन है, और यह मूल्यांकन तो सरकारी घोषणा पत्र में हुआ है। मतलब बाजार मूल्य कितना होगा आप खुद समझ सकते हैं। इलेक्शन एफिडेविट में बताया गया है कि श्रीमती कल्पना तिवारी ही खेती-बाड़ी का काम देखती हैं। आशुतोष भैया तो बस नेतागिरी करते हैं और लोन पर ली गई गाड़ी में बैठकर शान से घूमते हैं।
2. घनश्याम सिंह ने अपनी पत्नी का नाम नहीं बताया?
(शपथ पत्र में इनका नाम उल्लेखित नहीं है, इन्हें 'पति या पत्नी' के रूप में संबोधित किया गया है।)
पेशा और आय: इनका पेशा गृहिणी (Housewife) के रूप में दर्ज है। पिछले पांच वर्षों में इन्होंने कोई आयकर रिटर्न फाइल नहीं किया है और इनकी आय 'शून्य' दिखाई गई है।
चल संपत्ति: इनकी कुल चल संपत्ति का मूल्य ₹70,17,293 है। इसमें ₹40,000 नकद और बैंक खातों में लगभग ₹17,293 जमा हैं। इनके पास 580 ग्राम सोने के आभूषण हैं, जिनकी कीमत लगभग ₹69,60,000 है।
अचल संपत्ति: इनके नाम पर दतिया गिर्द में ₹14,00,000 मूल्य की कृषि भूमि (0.073 एकड़) है, जिसे इन्होंने वर्ष 2014 में खरीदा था।
देनदारी (Loan): इनके ऊपर किसी भी प्रकार का बैंक ऋण या सरकारी देनदारी शून्य है।
आभूषणों से लदी निर्धन रानी
इसका मतलब यह हुआ कि दतिया की रानी साहब, जिनके पास लगभग 600 ग्राम स्वर्ण आभूषण है, उनकी अपनी कोई इनकम नहीं है। लगभग एक एकड़ का खेत है लेकिन उससे भी कोई कमाई नहीं होती। मतलब हालत इतनी खराब है कि, इनकम टैक्स रिटर्न तक फाइल नहीं करती। कैश इन हैंड केवल ₹40000 है और बैंक में केवल ₹17000 जमा है। राजा साहब क्षमा कीजिएगा लेकिन मध्य प्रदेश में इससे ज्यादा बैंक बैलेंस तो आजकल लाडली बहनों का होता है। रानी साहब के बैंक अकाउंट में कुछ तो फिक्स डिपाजिट करवाना चाहिए था।
दतिया के राज परिवार में महिलाओं के सम्मान पर प्रश्न
यह इलेक्शन एफिडेविट दतिया के राज परिवार में महिलाओं के सम्मान पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। राजा घनश्याम सिंह की मानसिकता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। उन्होंने इलेक्शन एफिडेविट में अपनी पत्नी का नाम तक नहीं लिखा। अपनी पत्नी के नाम कोई बैंक एफडी नहीं करवाई। 2014 में 1 एकड़ से भी कम जमीन का खेत दिलवाया। जिसकी आज की तारीख में कीमत मात्र 14 लाख रुपए है। केवल 600 ग्राम गोल्ड ज्वेलरी है, और शायद वह उनको उनके मायके से मिली होगी।
सवाल तो बनता है कि जो व्यक्ति अपनी पत्नी को पर्दे के पीछे और अपने ऊपर डिपेंड बनाए रखना है। वह व्यक्ति दतिया की महिलाओं के लिए क्या करेगा?
वैसे एक बात और भी है। श्री आशुतोष तिवारी पर बाहरी होने का आरोप है। दतिया में लोगों को जानते नहीं है और चुनाव प्रचार के लिए समय कम है। श्री आशुतोष तिवारी की दौड़ धूप देखकर यह भी समझ में आता है कि, वह समय का पूरा उपयोग करना चाहते हैं लेकिन एक बात समझ में नहीं आती की ऐसी विषम परिस्थिति में श्री आशुतोष तिवारी की पत्नी, जो एक्चुअल में जमीदार भी हैं, चुनाव प्रचार क्यों नहीं कर रही?
यदि आपको यह न्यूज़ एनालिसिस पसंद आया है तो उम्मीद है कि आपको यह न्यूज़ एनालिसिस भी पसंद आएगा "दतिया उपचुनाव: आशुतोष और घनश्याम के बारे में वह बातें जिस पर जनता ने ध्यान नहीं दिया"। कृपया क्लिक करके पढ़िए। हमने अपनी समीक्षा में दोनों प्रत्याशियों के व्यक्तिगत परिचय और व्यवहार को शामिल नहीं किया। केवल आंकड़ों को शामिल किया है। यह बताया है कि आंकड़े जब बोलते हैं तो क्या बोलते हैं?

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